जबलपुर, मध्य प्रदेश: अधारताल के रहने वाले हिमांशु सोनी ने एमपीपीएससी परीक्षा में न सिर्फ दिव्यांग कोटे में प्रथम स्थान हासिल किया, बल्कि सामान्य श्रेणी की रैंक में भी 13वीं स्थान प्राप्त कर सबको चौंका दिया। हिमांशु जन्म से ही 100% अस्थि दिव्यांग हैं और उन्होंने इसी स्थिति में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की।
हिमांशु की यह सफलता उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत का प्रमाण है। 2022 में भी उन्होंने एमपीपीएससी परीक्षा पास की थी, लेकिन इस बार उनकी उपलब्धि और भी बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को भी पीछे छोड़ दिया।
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हिमांशु वर्तमान में जबलपुर के संचालक लोक शिक्षण विभाग में कार्यरत हैं। परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी नौकरी के साथ अध्ययन संतुलित किया और यह साबित किया कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की क्षमता पर अंकुश नहीं लगाती।
हिमांशु के माता-पिता दोनों ही रिटायर्ड शिक्षक हैं। उनके पिता महेंद्र कुमार सोनी और माता माधवी सोनी ने बताया कि हिमांशु ने हमेशा कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और लगन से किया।
हिमांशु ने कहा, “अक्सर दिव्यांग यह सोचकर बैठ जाते हैं कि ईश्वर ने उनके साथ न्याय नहीं किया, इसलिए वे कुछ नहीं कर पाएंगे। मैं चाहता हूँ कि मेरी सफलता ऐसे सभी लोगों के लिए प्रेरणा बने।”
हिमांशु सोनी, MPPSC चयनित: “मेरी सफलता केवल मेरी मेहनत और आत्मविश्वास का नतीजा है। दिव्यांग होना कोई बाधा नहीं है, बस लक्ष्य के प्रति समर्पण और लगन की जरूरत होती है।”
महेंद्र कुमार सोनी, पिता: “हिमांशु ने हमें गर्व महसूस कराया है। उसकी मेहनत और दृढ़ निश्चय सभी के लिए प्रेरणास्पद है।”
माधवी, माता: “हमेशा हिमांशु का समर्थन करते आए हैं। यह सफलता उसकी कठिन परिश्रम और धैर्य का परिणाम है।”
हिमांशु सोनी की यह उपलब्धि केवल एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि साहस, प्रेरणा और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए उदाहरण बन गई है।













