Harda Forest Probe: हरदा। एक तरफ देशभर में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान चलाया जा रहा है, वहीं हरदा जिले में अवैध पेड़ कटाई और लकड़ी के परिवहन के मामलों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिराली और आसपास के क्षेत्रों में बबूल, नीम, आम सहित कई पेड़ों की अवैध कटाई की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की लापरवाही और कथित सांठगांठ के कारण अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।
Harda Forest Probe: ताजा मामला सिराली क्षेत्र के ग्राम लोलागंरा से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार अवैध रूप से काटी गई लकड़ियों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को सूचना मिलने पर वन अमले ने ग्राम सुखरास के पास पकड़ा था। वन रक्षक राजेन्द्र बांके और कंप्यूटर ऑपरेटर ब्रजेश ठाकरे ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोककर हंडिया वन परिक्षेत्र के अधिकारियों को सौंप दिया था।
Harda Forest Probe: हालांकि आरोप है कि इसके बाद मामले में नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई और कथित रूप से मिलीभगत के चलते ट्रैक्टर-ट्रॉली को छोड़ दिया गया। सबसे हैरानी की बात यह है कि घटना को लगभग 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो कोई आधिकारिक कार्रवाई सामने आई है और न ही जब्त वाहन और लकड़ी की स्थिति स्पष्ट हो सकी है।
ट्रैक्टर-ट्रॉली आखिर गई कहां?
Harda Forest Probe: पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वन विभाग के कब्जे में दी गई लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली आखिर कहां गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वाहन वास्तव में जब्त किया गया था तो उसकी जब्ती पंचनामा, कार्रवाई और वर्तमान स्थिति की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।
Harda Forest Probe: सूत्रों का दावा है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में बबूल, नीम और अन्य प्रजातियों की लकड़ियां भरी हुई थीं, जिन्हें अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था। लेकिन वर्तमान में संबंधित अधिकारियों के पास इस संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं है।
जिम्मेदारों के अलग-अलग बयान
Harda Forest Probe: मामले में जब हंडिया-सिराली वन परिक्षेत्र के रेंज अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद परते से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं है और वे जानकारी जुटाने के बाद स्थिति स्पष्ट करेंगे।
Harda Forest Probe: वहीं हंडिया वन विभाग के कार्यवाहक अधिकारी विपिन वर्मा ने भी ट्रैक्टर-ट्रॉली की कार्रवाई से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि संबंधित जानकारी वन रक्षक से प्राप्त की जा सकती है।
Harda Forest Probe: दूसरी ओर वन रक्षक राजेन्द्र बांके और कंप्यूटर ऑपरेटर ब्रजेश ठाकरे का कहना है कि पत्रकार की सूचना पर उन्होंने वाहन को रोका था और आगे की कार्रवाई के लिए हंडिया वन विभाग के सुपुर्द कर दिया था।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
Harda Forest Probe: क्षेत्र के ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी के मामलों में इसी तरह की ढिलाई बरती जाती रही तो वन संपदा को भारी नुकसान होगा। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
Harda Forest Probe: अब सभी की नजरें वरिष्ठ वन अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना होगा कि विभाग इस मामले में जांच कर सच्चाई सामने लाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।









