MP News: खरीफ सीजन में किसानों के सामने नई चुनौती! चिंता में हजारों किसान

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Farmer ID Fertilizer E-Token System: खाद के लिए फार्मर आईडी जरूरी होने के नए नियम ने मध्य प्रदेश के कई किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खरीफ फसल की तैयारी के बीच किसान खाद लेने के लिए केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन नई व्यवस्था के कारण कई किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सरकार ने खाद वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ई-विकास प्रणाली के तहत ऑनलाइन ई-टोकन की व्यवस्था शुरू की है।

खाद के लिए फार्मर आईडी जरूरी नियम के तहत अब किसानों को खाद खरीदने से पहले ऑनलाइन ई-टोकन लेना होगा। टोकन मिलने के बाद यह 72 घंटे तक मान्य रहेगा और इसी अवधि में किसान तय किए गए खाद वितरण केंद्र से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी खरीद और कालाबाजारी पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

छतरपुर में हजारों किसान अभी भी व्यवस्था से बाहर
खाद के लिए फार्मर आईडी जरूरी होने के कारण छतरपुर जिले के हजारों किसान परेशान हैं। जिले में करीब 3.78 लाख किसान हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 1.21 लाख किसानों की फार्मर आईडी तैयार हो पाई है। वहीं केवल 31.9 हजार किसानों का पूरा पंजीयन हो सका है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को नई प्रक्रिया का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

फार्मर आईडी बनने में क्या आ रही सबसे बड़ी बाधा?
खाद के लिए फार्मर आईडी जरूरी व्यवस्था में सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों को हो रही है जिनकी जमीन का बंटवारा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है या जिनके आधार कार्ड और राजस्व रिकॉर्ड में नाम अलग-अलग दर्ज हैं। खसरा और आधार की जानकारी मेल नहीं खाने से फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है, जिससे किसान समय पर खाद लेने से वंचित हो रहे हैं।
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किस दस्तावेज की पड़ रही जरूरत?
खाद के लिए फार्मर आईडी जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए किसानों को आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी और जमीन से जुड़े दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं। जिन किसानों के दस्तावेजों में गलती है, उन्हें पहले तहसील और राजस्व विभाग के कार्यालयों में जाकर सुधार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है।

किसानों की मदद के लिए प्रशासन ने उठाए कदम
खाद के लिए फार्मर आईडी जरूरी नियम के बाद बढ़ती शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने हेल्पलाइन और विशेष शिविरों की शुरुआत की है। इन शिविरों में किसानों के दस्तावेजों की जांच, सुधार और पंजीयन की सुविधा दी जा रही है। साथ ही अधिक से अधिक किसानों को ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

क्या भविष्य में किसानों को मिलेगा फायदा?
खाद के लिए फार्मर आईडी जरूरी व्यवस्था को लेकर सरकार का दावा है कि इससे आने वाले समय में खाद वितरण ज्यादा पारदर्शी होगा और सही किसानों तक उर्वरक पहुंच सकेगा। हालांकि फिलहाल पंजीयन की धीमी गति और तकनीकी दिक्कतों के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खेती के समय प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
खाद के लिए फार्मर आईडी जरूरी नियम लागू होने के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी पात्र किसानों का जल्द से जल्द पंजीयन पूरा करना है। अगर समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो खरीफ सीजन के दौरान खाद उपलब्धता को लेकर दिक्कतें बढ़ सकती हैं और इसका असर खेती की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

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