Money Laundering Delhi : नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है। न्यायमूर्ति शीतल चौधरी की पीठ ने यह फैसला मानवीय आधार पर सुनाया। जावेद सिद्दीकी की पत्नी स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर से जूझ रही हैं और उनकी कीमोथेरेपी चल रही है। अदालत ने माना कि इस कठिन समय में पत्नी की देखभाल के लिए सिद्दीकी की उपस्थिति अनिवार्य है।
अदालत के फैसले का आधार न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दंपत्ति के तीनों बच्चे यूएई (UAE) में पढ़ाई कर रहे हैं और वर्तमान परिस्थितियों में उनका भारत आना संभव नहीं है। ऐसे में महिला के पास परिवार का अन्य कोई सदस्य मौजूद नहीं है, जिसके चलते एक पति के तौर पर सिद्दीकी का साथ होना आवश्यक है। सिद्दीकी द्वारा पेश किए गए मेडिकल दस्तावेजों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई है।
क्या है पूरा मामला? जावेद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय ने 18 नवंबर 2025 को ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। यह मामला अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। अदालत ने सिद्दीकी को 1-1 लाख रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार की शर्त पर दो सप्ताह की अंतरिम राहत दी है।
ED ने किया था जमानत का विरोध जावेद सिद्दीकी की जमानत याचिका का प्रवर्तन निदेशालय ने कड़ा विरोध किया था। ईडी का तर्क था कि सिद्दीकी गंभीर वित्तीय अपराधों में लिप्त हैं और जमानत मिलने पर वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को दरकिनार करते हुए कहा कि आरोपी अब तक जांच में सहयोग कर रहा है और उसके फरार होने की कोई आशंका नहीं है। अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सिद्दीकी को यह सीमित राहत प्रदान की है।










