Iran War UK-US Relations : ‘हमें अब उनकी जरूरत नहीं’: अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों में बढ़ी तल्खी, ईरान युद्ध पर ट्रंप ने स्टारमर को लगाई फटकार

 Iran War UK-US Relations : नई दिल्ली। अमेरिका और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चली आ रही सैन्य साझेदारी में दरारें स्पष्ट दिखाई देने लगी हैं। ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें अब ईरान के खिलाफ युद्ध में ब्रिटेन की मदद की आवश्यकता नहीं है।

ट्रंप की नाराजगी: ‘युद्ध जीतने के बाद आने वालों की जरूरत नहीं’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की आलोचना की। ट्रंप ने लिखा, “यूनाइटेड किंगडम, जो कभी हमारा सबसे महान सहयोगी रहा है, अब पश्चिम एशिया में दो विमानवाहक पोत (aircraft carriers) भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह ठीक है प्रधानमंत्री स्टारमर, हमें अब उनकी जरूरत नहीं है—लेकिन हम याद रखेंगे। हमें ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है जो युद्ध जीतने के बाद उसमें शामिल होने आते हैं!”

क्या है विवाद की असली जड़? दोनों नेताओं के बीच विवाद का मुख्य कारण ईरान पर हमले के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों का उपयोग न करने का स्टारमर का फैसला है। ट्रंप का आरोप है कि स्टारमर ने ऐतिहासिक रूप से करीबी संबंधों को खराब किया है। वहीं, कीर स्टारमर का अपना पक्ष है। उनका कहना है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को शुरुआती हमलों के लिए ब्रिटिश बेस का उपयोग करने की अनुमति इसलिए नहीं दी थी, क्योंकि उन्हें पहले यह सुनिश्चित करना था कि सैन्य कार्रवाई कानूनी और पूरी तरह नियोजित है। हालांकि, बाद में उन्होंने ईरान के मिसाइल डिपो और लॉन्चरों पर ‘रक्षात्मक हमलों’ (defensive strikes) के लिए अनुमति दे दी थी।

ब्रिटेन की क्या है स्थिति? ट्रंप की यह नाराजगी ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के उस बयान के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि वे ‘प्रिंस ऑफ वेल्स’ विमानवाहक पोत को संभावित तैनाती के लिए तैयार कर रहे हैं। हालांकि, रॉयटर्स के अनुसार, ब्रिटिश अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में इसे भेजने के बारे में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में पश्चिम एशिया के युद्धों को लेकर काफी सतर्कता बरती जा रही है, जिसका बड़ा कारण 2003 का ‘इराक संकट’ है। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को इराक में विनाशकारी हथियारों (WMD) के नाम पर आक्रमण करने के लिए बाद में माफी मांगनी पड़ी थी, क्योंकि वे हथियार कभी नहीं मिले थे। यह घटनाक्रम अमेरिका-ब्रिटेन के बीच दशकों पुराने ‘स्पेशल रिलेशनशिप’ के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

Share The News
[youtube_shorts]

Popular News

raipur-gold-shop-robbery-arrest:लक्ष्य ज्वेलर्स चोरी केस: डॉग स्क्वॉड की मदद से पुलिस ने दबोचे आरोपी

raipur-gold-shop-robbery-arrest: राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित लक्ष्य ज्वेलर्स...

CG Transfer Breaking : वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा फेरबदल, 21 कर्मचारियों का तबादला

CG Transfer Breaking :रायपुर। राज्य शासन के वाणिज्यिक कर...

Raipur Police Commissioner: IPS डॉ. संजीव शुक्ला ने संभाला पुलिस आयुक्त का पदभार… जानिए क्या कुछ कहा

Raipur Police Commissioner:रायपुर : रायपुर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के...

Related Articles

Popular Categories