निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत दो दिवसीय लखनऊ प्रवास पर हैं। प्रवास के पहले दिन उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में भाग लिया और समाज, जनसंख्या संतुलन, जातीय भेदभाव तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे।
मुस्लिम समाज और ऐतिहासिक जुड़ाव पर टिप्पणी
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि भारत में रहने वाले मुसलमानों के पूर्वज इसी भूमि से जुड़े थे और वे बाहर से आए समुदाय नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पुनः हिंदू परंपरा में लौटना चाहते हैं, उन्हें सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही समाज से अपील की कि घुसपैठियों को किसी भी प्रकार का रोजगार उपलब्ध न कराया जाए।
जनसंख्या संतुलन पर तीन बच्चों की अपील
सरसंघचालक ने जनसंख्या विज्ञान का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी समाज की कुल प्रजनन दर (TFR) 2.1 से नीचे चली जाती है तो वह समाज धीरे-धीरे घटने लगता है। इसी संदर्भ में उन्होंने हिंदू समाज से कम से कम तीन बच्चों का आग्रह किया। उनके अनुसार विवाह का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख नहीं, बल्कि सृष्टि विस्तार और सामाजिक कर्तव्य भी है।
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UGC नियमों और कानून व्यवस्था पर राय
हाल ही में चर्चा में आए UGC नियमों को लेकर भागवत ने कहा कि ये किसी विशेष वर्ग को लक्ष्य बनाकर नहीं बनाए गए हैं। उन्होंने कानून के पालन को आवश्यक बताया और कहा कि यदि किसी नियम में कमी महसूस हो तो उसे संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से बदला जा सकता है।
जातिवाद समाप्त करने का आह्वान
भागवत ने चिंता व्यक्त की कि लंबे समय से प्रयासों के बावजूद समाज में जातिवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि इसे खत्म करने के लिए केवल कानून नहीं, बल्कि मानसिक परिवर्तन आवश्यक है। समाज को मन से भेदभाव मिटाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।













