नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में फिटनेस को लेकर अब एक नया पैमाना तय किया जा रहा है। जल्द ही खिलाड़ियों को चयन के लिए Bronco टेस्ट पास करना जरूरी होगा। यह फिटनेस टेस्ट पहले रग्बी और यूरोपियन फुटबॉल में इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन अब इसे टीम इंडिया में भी लागू करने की तैयारी है।
इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान में बंगाल के खेल मंत्री मनोज तिवारी ने बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह टेस्ट खासतौर पर रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने की रणनीति है।
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“रोहित शर्मा के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी”
क्रिकट्रैकर से बातचीत में तिवारी ने कहा –
“2027 वर्ल्ड कप की योजना में विराट को बाहर करना मुश्किल होगा, लेकिन मुझे शक है कि रोहित को इसमें शामिल किया जाएगा। ब्रोंको टेस्ट कुछ दिन पहले ही लागू किया गया है और मेरा मानना है कि यह उन्हीं खिलाड़ियों के लिए है जिन्हें टीम मैनेजमेंट भविष्य में शामिल नहीं करना चाहता। रोहित अगर अपनी फिटनेस पर अतिरिक्त मेहनत नहीं करते तो उनके लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस टेस्ट को अभी क्यों लागू किया गया, जबकि नए हेड कोच के साथ इसे पहले भी शुरू किया जा सकता था। तिवारी का कहना है कि यह अचानक उठाया गया कदम कई सवाल खड़े करता है।
क्या है Bronco टेस्ट
- ब्रोंको टेस्ट रग्बी और फुटबॉल से जुड़ा फिटनेस चैलेंज है।
- इसमें खिलाड़ी को 20 मीटर, 40 मीटर और 60 मीटर की शटल रन लगातार करनी होती है।
- यह टेस्ट Yo-Yo टेस्ट से भी ज्यादा कठिन माना जाता है।
- टीम इंडिया के स्ट्रेंथ एंड कंडिशनिंग कोच एंड्रयू ली रू ने इसका सुझाव दिया है। उनका मानना है कि खिलाड़ियों को जिम की बजाय दौड़ और स्टैमिना पर फोकस करना चाहिए।
रोहित की चुनौती
38 वर्षीय रोहित शर्मा अभी भी 2027 वर्ल्ड कप तक खेलने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन अगर ब्रोंको टेस्ट में वे असफल होते हैं, तो उनका टीम में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि तिवारी ने इसे “रणनीतिक कदम” बताया है।













