भोपाल : वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसले में माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, भोपाल ने तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाले दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी बिल्लौर सिंह सोलंकी और कैलाश सोलंकी को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दोषसिद्ध मानते हुए प्रत्येक को चार-चार वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
मुखबिर की सूचना पर STF ने की थी कार्रवाई
प्रकरण के अनुसार एसटीएफ जबलपुर को तेंदुए की खाल की अवैध तस्करी की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। इस सूचना के आधार पर 21 फरवरी 2018 को कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा गया था। आरोपियों के कब्जे से चार टुकड़ों में कटी हुई दो नग प्रतिबंधित तेंदुए की खाल बरामद की गई थी।
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जबड़ा और केनाइन दांत भी हुए थे जब्त
छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से तेंदुए का जबड़ा और केनाइन दांत भी बरामद किए गए थे, जो वन्यजीव अपराध की गंभीरता को दर्शाते हैं। इस संबंध में थाना एसटीएफ भोपाल में विधिवत अपराध पंजीबद्ध किया गया था।
वैज्ञानिक साक्ष्यों से सिद्ध हुआ अपराध
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत वैज्ञानिक साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों का अपराध सिद्ध हुआ।
वन्यजीव संरक्षण को लेकर सख्त संदेश
न्यायालय के इस फैसले को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक कड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है, जिससे भविष्य में इस प्रकार के अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।











