West Bengal Elections TMC vs BJP : कोलकाता: पश्चिम बंगाल के आगामी राजनीतिक मुकाबले से ठीक पहले भारतीय टेनिस के दिग्गज लिएंडर पेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। पेस के इस फैसले को बंगाल की राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल एक मशहूर हस्ती का पार्टी में शामिल होना है, बल्कि उनकी पुरानी राजनीतिक निष्ठा में आए बड़े बदलाव का भी संकेत है। जानकारों का मानना है कि पेस के ‘भगवा खेमे’ में आने से बंगाल के मतदाताओं को एक सीधा और कड़ा संदेश गया है, जो राज्य में चल रहे ज़ोरदार राजनीतिक संघर्ष के बीच काफी मायने रखता है।
लिएंडर पेस के लिए राजनीति का मैदान नया नहीं है। साल 2021 में वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े थे। 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने पार्टी के लिए ज़ोर-शोर से प्रचार भी किया था, हालांकि उन्होंने स्वयं कोई चुनाव नहीं लड़ा था। अब टीएमसी से पूरी तरह किनारा कर भाजपा में शामिल होना उनके पुराने राजनीतिक जुड़ाव से पूर्ण विच्छेद को दर्शाता है। बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ मशहूर हस्तियों के समर्थन का चुनावी नतीजों पर गहरा असर पड़ता है, पेस की यह नई पारी भाजपा के लिए एक मजबूत मनोवैज्ञानिक बढ़त मानी जा रही है।
पेस का भाजपा में शामिल होना केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं है। भारतीय टेनिस इतिहास के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में से एक होने के नाते, पेस ने हमेशा देश के लिए डेविस कप जैसे बड़े मंचों पर अहम भूमिका निभाई है। भाजपा में अपनी भूमिका को लेकर उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है; उनका मानना है कि अब खेल के भविष्य को संवारने का समय आ गया है। वे भारत में उभरती हुई युवा प्रतिभाओं को निखारने और खेल से दूर हो चुके पूर्व खिलाड़ियों को फिर से जोड़ने के विजन पर काम करना चाहते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या लिएंडर पेस आगामी चुनावों में उम्मीदवार के रूप में नजर आएंगे या केवल पार्टी के ‘स्टार प्रचारक’ की भूमिका निभाएंगे। बंगाल की सियासत में फिलहाल इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि उनके आने से भाजपा के वोट बैंक, खासकर शहरी और युवा वर्ग में कितना इजाफा होगा। पार्टी को उम्मीद है कि पेस की अंतरराष्ट्रीय साख और खेल के प्रति उनका समर्पण मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल होगा।
फिलहाल, लिएंडर पेस की इस राजनीतिक ‘सर्व’ ने विपक्षी खेमे में भी खलबली मचा दी है। बंगाल की तपती राजनीति में अब देखना यह होगा कि पेस की यह नई पारी कितनी लंबी चलती है और क्या वे टेनिस कोर्ट की तरह राजनीति के कोर्ट में भी ‘ग्रैंड स्लैम’ जीत पाएंगे। चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि लिएंडर के भाजपा में आने से चुनावी नतीजों का ऊँट किस करवट बैठता है।









