Rewa news:रीवा कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान मंगलवार को एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया, जिसने प्रशासन की संवेदनशीलता और मानवीयता की नई मिसाल पेश की। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर की मांग को लेकर एक गरीब पिता अपनी विकलांग बेटी को गोद में उठाकर जनसुनवाई में पहुंचा। फरियादी की समस्या सुनने के बाद जिला कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और पिता-पुत्री को शासकीय वाहन से उनके गांव तक भिजवाया।
रीवा कलेक्टर द्वारा हाल ही में गांव-गांव जाकर चौपाल लगाई जा रही है, जिसके बाद अब जनसुनवाई में भी बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। कलेक्टर का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान समय पर हो जाए, तो लोगों को जिला मुख्यालय तक आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मंगलवार को कलेक्ट्रेट के मोहन सभागार में आयोजित जनसुनवाई के दौरान गोदहा गांव निवासी एक पिता अपनी विकलांग बेटी को गोद में उठाकर पहुंचा। उसने कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए बताया कि उसके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है और वह लंबे समय से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नाम जुड़वाने की कोशिश कर रहा है।
फरियादी ने आरोप लगाया कि जब भी प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में उसका नाम जोड़ा जाता है, बाद में उसे हटा दिया जाता है। इतना ही नहीं, उसने यह भी आरोप लगाया कि नाम जोड़ने के बदले रोजगार सहायिका रामरति साहू द्वारा उससे दो हजार रुपये की मांग की जा रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर ने तत्काल जनपद सीईओ को जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि रोजगार सहायिका पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए और पात्रता के आधार पर विकलांग बेटी के पिता का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में जोड़ा जाए।
जनसुनवाई के दौरान मौजूद लोग उस समय भावुक हो गए जब कलेक्टर ने पिता की परेशानी को देखते हुए मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत शासकीय वाहन की व्यवस्था कर पिता और उसकी विकलांग बेटी को जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर उनके गांव सुरक्षित पहुंचाने के निर्देश दिए।
कलेक्ट्रेट में मौजूद लोगों ने कलेक्टर के इस व्यवहार की सराहना की। लोगों का कहना था कि प्रशासन का ऐसा संवेदनशील रवैया आम नागरिकों के भरोसे को मजबूत करता है।
रीवा जिले में लगातार आयोजित हो रही चौपाल और जनसुनवाई कार्यक्रमों के जरिए प्रशासन लोगों की समस्याओं को सीधे सुनकर उनका समाधान करने का प्रयास कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक तेजी से पहुंच सकेगा।









