Share Market News : मुंबई. जहां एक तरफ लेंसकार्ट का आईपीओ (IPO) अपनी ऊंची वैल्यूएशन के चलते बीते कुछ दिनों से निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। वहीं इसके फाउंडर पीयूष बंसल पर वैल्यूएशन में हेरफेर करने का संगीन आरोप भी लगाया गया था, जिसके बाद कई फिनफ्लूएंसर्स ने निवेशकों को इस आईपीओ से दूर रहने की सलाह भी दे डाली थी।
Share Market News : लेंसकार्ट IPO को जबरदस्त प्रतिसाद
लेकिन इसके उलट अब निवेशकों के जबरदस्त रिस्पांस ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। इसके साथ ही 7,278 करोड़ रुपये के इस इश्यू को निवेशकों ने 28 गुना ज्यादा सब्सक्राइब किया है। कंपनी को 9.97 करोड़ शेयर जारी करने थे, मगर बोलियां 281 करोड़ शेयरों के लिए आईं, और कुल बोली की रकम 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंच गई है। हालांकि शेयर की कीमत 382 से 402 रुपये प्रति शेयर तय की गई थी।
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सफलता के पीछे कौन
खबर है कि, इस जबरदस्त सफलता के पीछे संस्थागत निवेशकों की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही रही, जिनका हिस्सा करीब 40 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हुआ। कुछ विश्लेषकों ने यह भी चेतावनी दी थी कि कंपनी का मूल्यांकन बहुत ऊंचा है, लेकिन निवेशकों का भरोसा लेंसकार्ट की लंबे समय की ग्रोथ स्टोरी पर टिका रहा। उम्मीद है कि 6 नवंबर को शेयरों की अलॉटमेंट होगी, और लिस्टिंग की संभावित तारीख 10 नवंबर है।
ग्रो आईपीओ के लिए जबरदस्त उत्साह
वहीं बात करें ब्रोकरेज कंपनी ग्रो का आईपीओ की तो बीते 4 नवंबर को ये आईपीओ खुला, जिसके लिए रिटेल निवेशकों की ओर से जबरदस्त उत्साह देखने को मिला था. हालांकि इससे पहले कंपनी ने अपना आईपीओ आज 3 नवंबर को एंकर निवेशकों के लिए खोल दिया था। वहीं तब इसे पब्लिक के लिए IPO खुलने से पहले बड़े घरेलू म्यूचुअल फंड और विदेशी फंड से 50,000 करोड़ रुपये की बोलियां मिली थीं, जिसे आईपीओ के लिए शानदार रेस्पॉन्स माना गया।
जानकारी दें कि, ब्रोकरेज कंपनी ग्रो एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो सीधे कस्टमर को स्टॉक, डेरिवेटिव्स, बॉन्ड्स, म्यूचुअल फंड्स जैसी सर्विस ऑफर करता है। बीते जून 2025 तक इसके 12.6 मिलियन एक्टिव क्लाइंट्स रहे। इसका मार्केट शेयर 26.27 फीसदी है।
क्या है विश्लेषकों का कहना
यह एक मोबाइल फर्स्ट ऐप है, इन-हाउस टेक्नोलॉजी से चलता है। FY25 में रेवेन्यू 4056 करोड़ रुपये था, नेट प्रॉफिट मार्जिन 44 फीसदी। यानी 1824 करोड़ का प्रॉफिट। कंपनी लगातार प्रॉफिटेबल ही दिखाई देती है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉस्ट मैनेजमेंट से ग्रोथ तेज जरूर है। लेकिन इसमें रिस्क भी हैं. डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में रेगुलेटरी चेंजेस आ सकते हैं। वहीं इसके ब्रोकरेज फीस स्ट्रक्चर भी बदले जा सकते हैं। इसके अलावा इसका रिटेल इन्वेस्टर पर जरुरत से ज्यादा डिपेंडेंसी दिखती है और टेक्नोलॉजी मेंटेनेंस का खर्चा भारी है जो मायने रखता है।













