Measures to Boost Kharif Crop Yield: कतार में बुवाई और संतुलित उर्वरक बढ़ाएंगे मिट्टी की ताकत; कृषि वैज्ञानिकों ने बताए पैदावार के अचूक उपाय

VIKASH KHALKHO

Measures to Boost Kharif Crop Yield: रायपुर। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के लिए अपनी फसलों की उन्नत पैदावार और मिट्टी की सेहत सुधारने की तैयारियां तेज हो गई हैं। कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर अगर किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो खरीफ की फसलों में 20 से 25 प्रतिशत तक की ठोस वृद्धि आसानी से हासिल की जा सकती है। इसके लिए बुवाई से लेकर फसल प्रबंधन तक कुछ बेहद जरूरी और बुनियादी नियमों का पालन करना अनिवार्य है, जिससे न केवल खेती की लागत कम होगी बल्कि उत्पादन भी रिकॉर्ड तोड़ होगा।

उन्नत बीजोपचार और गर्मी की गहरी जुताई से थमेगा रोगों का प्रकोप

विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर उत्पादन की शुरुआत हमेशा सही बीज के चयन से होती है। किसानों को हमेशा अपने स्थानीय कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार प्रमाणित एवं संकर (Hybrid) बीजों का ही चुनाव करना चाहिए। फसलों को शुरुआती दौर में लगने वाली फंगस और बीमारियों से बचाने के लिए बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक या ट्राइकोडर्मा से उपचारित (Seed Treatment) अवश्य करना चाहिए। इसके साथ ही, मई और जून के महीनों में मिट्टी पलटने वाले हल (M.B. Plough) से खेत की गहरी जुताई करने की सलाह दी गई है, जिससे मिट्टी में छिपे हानिकारक कीड़े-मकौड़े और उनके अंडे तेज धूप से स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं।रबी सीजन के फसलों की बुवाई में हो रही देरी, किसानों की बढ़ी मुश्किल |  Sowing of rabi season is getting delayed increasing the difficulties of  farmers

मिट्टी की ताकत बढ़ाएगी हरी खाद और संतुलित उर्वरकों का गणित

धान या अन्य मुख्य खरीफ फसलों की रोपाई या बुवाई करने से पहले खेतों में ढैंचा या सनई जैसी हरी खाद की बुवाई करके उसे मिट्टी में दबा देना एक अचूक प्राकृतिक उपाय है, जो मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है। इसके अलावा, रासायनिक खादों का अंधाधुंध प्रयोग करने के बजाय हमेशा मिट्टी परीक्षण (Soil Test) की रिपोर्ट के आधार पर ही यूरिया, सिंगल सुपर फास्फेट और पोटाश का संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए। दलहनी और तिलहनी फसलों में जिप्सम का प्रयोग और धान की फसल में जिंक सल्फेट डालने से पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और पैदावार में भारी उछाल आता है।जून में कम बार‍िश से प‍िछड़ी खरीफ फसलों की बुवाई | Lower June Rainfall  Impacts Kharif Sowing

कतार में बुवाई, जल प्रबंधन और फसल चक्र से घटेगा खेती का जोखिम

खेतों में पारंपरिक रूप से बीजों को छिटक कर बोने के बजाय सीड ड्रिल या कतार विधि (Line Sowing) से बोना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। इससे पौधों के बीच की दूरी और उनकी संख्या सही रहती है, जिससे खरपतवार (निकाई-गुड़ाई) नियंत्रण आसान होता है और पौधों को हवा व धूप उचित मात्रा में मिलती है। वर्षा जल के संचयन के लिए खेतों की मेड़बंदी करना और जलभराव की स्थिति में जल निकासी का उचित प्रबंध करना भी उतना ही आवश्यक है। कृषि वैज्ञानिकों ने अंत में यह विशेष सलाह दी है कि खेत में एक ही फसल बार-बार उगाने के बजाय फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाएं और मुख्य फसल के साथ दलहनी फसलें (अंतर-फसल) बोएं। इससे मिट्टी को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन मिलती है और किसानों के लिए फसल नुकसान का जोखिम भी बेहद कम हो जाता है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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