सिंगरौली। सिंगरौली जिले के उज्जैनी मझौली क्षेत्र में स्थित जेपी कंपनी के कर्मचारियों ने लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा और सुविधाओं की कमी के विरोध में एक बार फिर जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया है। नाराज़ कर्मचारियों ने शुक्रवार को कंपनी के मुख्य द्वार पर एकजुट होकर कार्य बंद कर दिया और अपनी 9 सूत्रीय प्रमुख मांगों के साथ तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं हुआ, तो वे कंपनी का कार्य पूरी तरह बंद कर धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।
कर्मचारियों की नाराज़गी के पीछे मुख्य कारण सुरक्षा और वेतन में अनियमितता है। कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले 10 से 15 वर्षों से कंपनी में कार्यरत हैं, फिर भी उन्हें अब तक पहचान पत्र (आईडी कार्ड) उपलब्ध नहीं कराया गया है। उनकी शिकायत है कि हादसे की स्थिति में पहचान और जिम्मेदारी तय नहीं हो पाने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों में लगातार असुरक्षा की भावना बनी रहती है। इसके अतिरिक्त, कंपनी द्वारा वेतन भुगतान में भी गंभीर अनियमितताएँ की जा रही हैं, जिससे कर्मचारियों के लिए परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है।
नौ सूत्रीय मांगों में सबसे प्रमुख मुद्दा वेतन असमानता का है। कर्मचारियों ने बताया कि अन्य आउटसोर्स कंपनियाँ जैसे डिपो लिमिटेड अमिलिया कोल माइंस में प्रतिदिन 990 रुपये वेतन दिया जा रहा है, और अन्य जिलों में कंपनियाँ 1350 रुपये प्रतिदिन का भुगतान कर रही हैं, जबकि डिपो नॉर्थ कोल माइंस में ड्राइवरों को केवल 505 रुपये प्रतिदिन मिल रहा है। कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें भी अन्य कंपनियों की तर्ज पर उचित और समान भुगतान किया जाए, ताकि उनके साथ हो रहे आर्थिक शोषण को रोका जा सके।
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कर्मचारियों के अचानक हड़ताल पर चले जाने से कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन में हलचल मच गई है। स्थानीय कांग्रेस पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष ने भी कर्मचारियों की इन मांगों को सुरक्षा, सम्मान और अधिकार से जुड़ी बुनियादी मांगें बताते हुए अपना समर्थन दिया है। इस संबंध में तहसीलदार ने कर्मचारियों से ज्ञापन प्राप्त कर कंपनी प्रबंधन से जल्द बातचीत कर मामले को सुलझाने का आश्वासन दिया है। कर्मचारी उम्मीद जता रहे हैं कि प्रशासन हस्तक्षेप कर जल्द समाधान निकालेगा, क्योंकि उनका कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कंपनी प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया था, जिससे मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।









