Jabalpur News : जबलपुर। राजधानी भोपाल का ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज एक बार फिर सुर्खियों में है। 18 करोड़ की लागत से आठ साल में बने इस पुल की 90 डिग्री मोड़ वाली डिजाइन पर उठे सवाल अब हाईकोर्ट तक पहुंच गए हैं। सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले पर अहम आदेश जारी करते हुए मैनिट (मौलाना आज़ाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) भोपाल के निदेशक को निर्देश दिया कि वरिष्ठ प्रोफेसरों की टीम गठित कर पुल की तकनीकी जांच कराई जाए और रिपोर्ट 10 सितंबर 2025 तक अदालत में पेश की जाए।
Jabalpur News : दरअसल, सोशल मीडिया पर इस पुल को लेकर भारी आलोचना हुई थी। लोग कह रहे थे कि यह संरचना भविष्य में गंभीर हादसों की वजह बन सकती है। जनता ने इसे न केवल असुरक्षित बल्कि करदाताओं के पैसे की बर्बादी करार दिया।
सुनवाई के दौरान ठेकेदार पुनीत चड्ढा की याचिका पर भी विचार हुआ, जिसमें उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा उन्हें ब्लैकलिस्ट किए जाने को चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने ठेकेदार को फिलहाल बड़ी राहत देते हुए ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी।
अब पूरा मामला मैनिट की जांच रिपोर्ट पर टिका है। अगर रिपोर्ट में डिजाइन और संरचना को खतरनाक पाया जाता है, तो यह पुल शहर के लिए सबसे बड़ा इंजीनियरिंग विवाद साबित हो सकता है। वहीं, सुरक्षित साबित होने पर सरकार और ठेकेदार दोनों को राहत मिलेगी।













