Indore Honey Trap Case: इंदौर; 04 जून 2026। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में हाल ही में सामने आए बहुचर्चित कथित हनी ट्रैप और एक रसूखदार शराब कारोबारी से करोड़ों की ब्लैकमेलिंग के मामले में इंदौर पुलिस और क्राइम ब्रांच की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने के बाद भी पुलिस कड़ाई से अनुसंधान में जुटी हुई है। इसी कड़ी में पुलिस ने हाल ही में पकड़े गए दो अन्य प्रमुख आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। इंदौर पुलिस के आला अधिकारियों का साफ कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तमाम तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को बारीकी से परखा जा रहा है।
मोबाइल और डिजिटल उपकरण फॉरेंसिक लैब भेजे; साजिश का खुलेगा राज
मामले की प्रगति के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए इंदौर क्राइम ब्रांच के डीसीपी श्री राजेश त्रिपाठी ने बताया कि आरोपियों के ठिकानों और उनके कब्जे से जब्त किए गए सभी मोबाइल फोन, लैपटॉप तथा अन्य डिजिटल उपकरणों को तत्काल प्रभाव से फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) जांच के लिए भेज दिया गया है। डीसीपी के मुताबिक, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही तकनीकी रूप से यह साफ हो पाएगा कि आरोपियों के बीच आपस में किस तरह की बातचीत (चैट और कॉल रिकॉर्ड्स) हुई थी। इसके साथ ही यह भी प्रमाणित हो सकेगा कि क्या पीड़ित व्यापारी को डराने या जाल में फंसाने के लिए किसी प्रकार की गुप्त वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी या फिर इस पूरी ब्लैकमेलिंग के पीछे कोई बहुत बड़ी आपराधिक साजिश रची गई थी।
श्वेता जैन के पुराने इतिहास पर नजर, हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग दोनों एंगल से जांच
पुलिस अनुसंधान में यह बात भी प्रमुखता से सामने आई है कि मामले की मुख्य संदेही आरोपियों, खासकर श्वेता जैन का पूर्व में भी इसी तरह की संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियों से जुड़ा पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इसी आधार पर विभिन्न जांच एजेंसियां यह सुराग लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस मौजूदा प्रकरण में भी रसूखदारों का अश्लील वीडियो बनाकर उन पर दबाव बनाने, पद का दुरुपयोग करने या उन्हें मोटी रकम के लिए धमकाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में उनके पास कोई ऐसा अकाट्य या ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तैर रही मनगढ़ंत कहानियों की पुष्टि की जा सके।
32 जीबी पेनड्राइव और सेक्स वर्करों की चर्चाओं पर पुलिस का रुख
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में कई तरह के सनसनीखेज दावे किए जा रहे हैं। इंटरनेट पर चर्चा है कि इस रैकेट में सेक्स वर्करों के माध्यम से रसूखदारों के वीडियो बनवाए जाते थे, और इस संबंध में एक ’32 जीबी की गोपनीय पेनड्राइव’ भी पुलिस के हाथ लगी है। इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने कहा कि अफवाहों के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और फॉरेंसिक लैब से आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक वास्तविक तथ्यों को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल, इंदौर पुलिस इस पूरे प्रकरण को केवल ट्रेडिशनल हनी ट्रैप न मानकर विशुद्ध रूप से ‘प्रायोजित ब्लैकमेलिंग’ के कोण से भी खंगाल रही है और इस गिरोह के अंतरराज्यीय संपर्कों को खंगालने के लिए सभी कड़ियों को जोड़ रही है।










