बीजिंग | चीन में हो रही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। सोमवार को जारी घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। इसमें कहा गया कि इस हमले के अपराधियों, आयोजकों और उन्हें समर्थन देने वालों को सजा दिलाना जरूरी है। खास बात यह रही कि इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे।
22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। SCO की जून में हुई रक्षा मंत्रियों की बैठक में इस हमले का जिक्र नहीं किया गया था। तब भारत ने नाराजगी जताते हुए संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
मोदी का सख्त संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट को संबोधित करते हुए आतंकवाद को दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है और पहलगाम हमला इसकी भयावहता का ताजा उदाहरण है।
मोदी ने सवाल उठाया— “क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद को दिया जा रहा खुला समर्थन स्वीकार किया जा सकता है?”
भारत-रूस संबंधों पर जोर
साइडलाइन मीटिंग में मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब 40 मिनट बातचीत हुई। मोदी ने कहा कि भारत-रूस रिश्ते कठिन हालात में भी मजबूत रहे हैं और यह साझेदारी वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अहम है। पुतिन ने भी भारत-चीन के साथ मिलकर यूक्रेन संकट के समाधान के प्रयासों की सराहना की।
SCO की अहमियत
इस समिट में 20 से ज्यादा देशों के नेता शामिल हुए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें भारत ने आतंकवाद के मुद्दे को मजबूती से उठाया और घोषणापत्र में अपना पक्ष दर्ज कराया।













