निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत काफी कमजोर रही और शुरुआती कारोबार में ही बाजार में जबरदस्त बिकवाली का माहौल देखने को मिला। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेत और मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिकी बाजार में आई भारी गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भी घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। इसी वजह से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांक लाल निशान के साथ खुले और शुरुआती घंटों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा।
ग्लोबल बाजार से मिले कमजोर संकेत
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को झकझोर दिया है। निवेशकों ने जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार का डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग 800 अंक गिरकर बंद हुआ, जिसका सीधा असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर पड़ा।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी दोनों गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे निवेशकों का भरोसा और कमजोर हो गया।
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सेंसेक्स और निफ्टी में आई बड़ी गिरावट
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 356 अंकों की गिरावट के साथ 79,658 के स्तर पर खुला। कुछ ही समय में यह गिरकर करीब 404 अंकों की कमजोरी तक पहुंच गया।
वहीं एनएसई का निफ्टी भी 102 अंकों की गिरावट के साथ 24,663 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में व्यापक गिरावट के बीच केवल आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों जैसे इंफोसिस और टीसीएस में मामूली बढ़त देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में तेजी आने से महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और कमजोर हुआ है।
हालांकि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका से मिली अस्थायी राहत एक सकारात्मक खबर है, लेकिन फिलहाल युद्ध की आशंका निवेशकों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि इस समय घबराकर फैसले लेने से बचें और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में लंबी अवधि के लिए निवेश करें। इससे जोखिम कम किया जा सकता है और भविष्य में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी बनी रहती है।











