Gwalior District Court Verdict : मृत महिला को जिंदा बताकर बेची थी करोड़ों की जमीन: ग्वालियर जिला कोर्ट ने जालसाज को दी कड़ी सजा

Gwalior District Court Verdict : ग्वालियर : ग्वालियर जिला न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में सेवानिवृत्त संयुक्त कलेक्टर उमा करारे की पारिवारिक जमीन को फर्जी तरीके से बेचने वाले आरोपी भगवान सिंह को सात साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर अलग-अलग धाराओं में पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी पहचान खड़ी कर राजस्व रिकॉर्ड के साथ खिलवाड़ करने से जुड़ा है।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद जमरोहा स्थित 2.257 हेक्टेयर जमीन का है। उमा करारे के पिता की मृत्यु के बाद उनकी माता कंचन देवी का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज था। साल 2015 में इस जमीन को षडयंत्रपूर्वक चरन सिंह नामक व्यक्ति को बेच दिया गया। इस फर्जी रजिस्ट्री में भगवान सिंह गवाह बना था। जब उमा करारे को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उमा करारे की मां की मृत्यु तो काफी समय पहले ही हो चुकी थी।

गांव की महिला को बनाया ‘फर्जी कंचन देवी’

पुलिस तफ्तीश और कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह साबित हुआ कि भगवान सिंह ने अपने ही गांव की एक महिला बतासो बाई को उमा करारे की दिवंगत मां ‘कंचन देवी’ बनाकर रजिस्ट्रार कार्यालय में पेश किया था। आरोपी ने न केवल पहचान पत्र के साथ छेड़छाड़ की, बल्कि फर्जी गवाही देकर पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया को अंजाम दिया। कोतवाली पुलिस ने 24 अप्रैल 2018 को मामला दर्ज किया था और दिसंबर 2019 में भगवान सिंह को गिरफ्तार किया गया था।

दो आरोपी बरी, मास्टरमाइंड को सजा

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि भगवान सिंह ने धोखाधड़ी में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, केस के दो अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने कोर्ट के समक्ष मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने भगवान सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना और सात साल की सजा सुनाई।

धर्मेंद्र शर्मा, शासकीय अधिवक्ता, जिला कोर्ट, ग्वालियर

“जमरोहा स्थित जमीन की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी भगवान सिंह को कोर्ट ने दोषी पाया है। आरोपी ने एक मृत महिला की जगह फर्जी महिला को खड़ा कर रजिस्ट्री कराई थी। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर उसे 7 साल की सजा और 5000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। दो अन्य आरोपियों को साक्ष्य न होने के कारण बरी किया गया है।”

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