Guru Nanak Jayanti 2025 : आज, 5 नवंबर, को सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को देशभर में श्रद्धा, सेवा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। गुरुद्वारों में विशेष सजावट की गई है, और सुबह-सुबह निकाली गई प्रभात फेरियों में हजारों श्रद्धालु “सतनाम वाहे गुरु” का जाप करते हुए भक्ति में डूब गए।
Guru Nanak Jayanti 2025 : गुरु पर्व की रौनक: प्रभात फेरी और अखंड पाठ
गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था, और उनका जीवन प्रेम, समानता और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है।
सजावट और रोशनी: दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब से लेकर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर तक, हर गुरुद्वारा रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है।
अखंड पाठ: गुरुद्वारों में पिछले 48 घंटों से चल रहे अखंड पाठ की आज समाप्ति होगी, जिसके बाद विशेष कीर्तन और धार्मिक प्रवचन होंगे।
प्रभात फेरियां: भोर में निकाली गई प्रभात फेरियों में बच्चे, बूढ़े और युवा सभी शामिल हुए। सेवादारों ने जगह-जगह प्रसाद वितरण किया, जो गुरु नानक देव जी के ‘किरत करो, नाम जपो, वंड छको’ (काम करो, ईश्वर का नाम जपो, और बाँट कर खाओ) के उपदेश को दर्शाता है।
लंगर: समानता और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक
गुरु पर्व का सबसे बड़ा और प्रेरक पहलू है लंगर का आयोजन। दिनभर सभी गुरुद्वारों में लाखों लोगों ने एक साथ लंगर का प्रसाद ग्रहण किया। यह लंगर, जिसमें अमीर-गरीब, ऊँच-नीच का कोई भेद नहीं होता, मानवता और समानता के गुरु नानक देव जी के मूल संदेश को जीवित रखता है। निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे सेवादार और श्रद्धालु इस उत्सव की ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देते हैं।
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अपने प्रियजनों को भेजें यह पावन संदेश
गुरु नानक जयंती के इस शुभ अवसर पर आप अपने प्रियजनों को ये विशेष शुभकामनाएँ भेज सकते हैं:
- नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला। (नानक का नाम लेने से हमारा उत्थान हो, और आपके आशीर्वाद से सबका भला हो।) गुरु पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!
- गुरु नानक देव जी के प्रकाश से आपके जीवन में प्रेम, शांति और समृद्धि का वास हो। वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह!
- हर मन में सेवा, हर दिल में करुणा – यही है गुरु नानक का शाश्वत संदेश। गुरु पर्व की बधाई।









