Saturday, September 5, 2026
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CG पौधारोपण घोटाला: रायपुर, धमतरी और कोरिया में फूंके गए करोड़ों! लगाए गए लाखों पौधे, लेकिन जमीन पर दिखी ‘कागजी हरियाली’

Chhattisgarh Plantation Scam: छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना को लेकर जमीनी स्तर पर सामने आई तस्वीरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले डेढ़ दशक में राज्य में हरियाली बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर लाखों पौधे लगाए गए। सरकारी रिपोर्टों में इन योजनाओं को सफल बताया गया, लेकिन कई प्रमुख परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति इससे अलग नजर आ रही है।

छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना के तहत राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया था। धमतरी-नगरी राम वन गमन मार्ग, नवा रायपुर का रतनजोत प्रोजेक्ट, पचेड़ा प्लांटेशन और चिरमिरी ऑक्सीजन पार्क जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च हुए।इन परियोजनाओं में एक लाख से अधिक पौधे लगाने का दावा किया गया था, लेकिन कई स्थानों पर अब सूखे पौधे, खाली गड्ढे और कटे हुए ठूंठ ही दिखाई दे रहे हैं।

वन आवरण बढ़ने के दावों के बीच उठे सवाल
छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां कई परियोजनाओं में पौधे नहीं बचे, वहीं वन एवं वृक्ष आवरण बढ़ने के राष्ट्रीय आंकड़े सामने आ रहे हैं।भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 में छत्तीसगढ़ को वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में देश में शीर्ष स्थानों में बताया गया है। ऐसे में जमीनी स्थिति और सरकारी आंकड़ों के बीच अंतर चर्चा का विषय बन गया है।
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10 साल में हजारों करोड़ खर्च
छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना के लिए पिछले एक दशक में बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च की गई। पौधारोपण, फेंसिंग और रखरखाव के लिए कैम्पा फंड और विभागीय बजट से 2500 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च होने की जानकारी सामने आई है।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं होता, उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।

पचेड़ा प्लांटेशन में दिखे कटे हुए पेड़
छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना के तहत नवा रायपुर के पचेड़ा क्षेत्र में वर्ष 2019-20 में करीब 3 करोड़ रुपए खर्च कर 66 हजार से अधिक पौधे लगाए गए थे।यहां नीम, आंवला, शीशम, इमली, साजा, बीजा और बहेड़ा जैसी प्रजातियों का रोपण किया गया था। लेकिन अब कई स्थानों पर कटे हुए पेड़ों के ठूंठ दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संरक्षण और निगरानी की कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

राम वन गमन मार्ग की बदली तस्वीर
छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना के तहत धमतरी से नगरी तक 56 किलोमीटर लंबे राम वन गमन मार्ग पर भी बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया था।करीब 2.5 करोड़ रुपए खर्च कर 14 हजार पौधे लगाए गए थे। इनमें पीपल, बरगद, नीम, आम और इमली जैसी प्रजातियां शामिल थीं। लेकिन वर्तमान में कई स्थानों पर पौधे गायब हैं और केवल टूटे हुए ट्री गार्ड व खाली जगहें नजर आती हैं।

स्थानीय लोगों ने बताई वजह
छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पौधारोपण के बाद नियमित सिंचाई और देखरेख नहीं की गई।ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआती चरण के बाद अधिकांश पौधों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया, जिससे बड़ी संख्या में पौधे सूख गए।

वन विभाग का पक्ष भी आया सामने
छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना को लेकर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां पौधारोपण के लिए अनुकूल नहीं थीं।धमतरी वन मंडल के अधिकारियों के अनुसार कई स्थानों पर मुरमयुक्त और कठोर जमीन होने के कारण पौधों का जीवित रहना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।

अब उठ रही जवाबदेही की मांग
छत्तीसगढ़ पौधारोपण परियोजना की मौजूदा स्थिति सामने आने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने जवाबदेही तय करने की मांग की है।उनका कहना है कि केवल पौधारोपण के आंकड़े जारी करना पर्याप्त नहीं है। यह भी जरूरी है कि लगाए गए पौधों की जीवित रहने की दर, रखरखाव और परियोजनाओं के वास्तविक परिणामों की नियमित समीक्षा की जाए।फिलहाल इन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति ने हरियाली बढ़ाने के दावों और वास्तविकता के बीच के अंतर को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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