CG Cabinet Decision: नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की गरिमामयी अध्यक्षता में मंगलवार (26 मई 2026) को मंत्रालय महानदी भवन में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कस्टमाइज्ड विधिक बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के युवाओं, अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकास और प्रशासनिक सुशासन (Good Governance) से जुड़े कई दूरगामी और कड़े नीतिगत निर्णय लिए गए हैं। मंत्रिपरिषद ने शासकीय मण्डलों के कार्य विभाजन में विधिक सुधार करने के साथ-साथ सड़क निर्माण कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को एक निश्चित फार्मूले के तहत वित्तीय राहत देने का कस्टमाइज्ड विधिक मार्ग प्रशस्त किया है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन आएगा नया छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल; ‘कार्य आवंटन नियम’ में विधिक संशोधन, मंत्रिपरिषद की बैठक में युवाओं के कस्टमाइज्ड रोजगार और परीक्षाओं के सुचारू संचालन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विधिक निर्णय लिया गया है:
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल को पूर्ण रूप से सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के प्रशासनिक नियंत्रण और अधीन लाने के विधिक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के लिए “छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम” में आवश्यक विधिक संशोधन किए जाने का मार्ग साफ हो गया है।
उल्लेखनीय है कि “छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल अधिनियम, 2026” के विधिक रूप से लागू होने के बाद, पूर्व में कार्यरत छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल (व्यापम) का पूर्ण विलय इस नए वृहद कर्मचारी चयन मण्डल में कस्टमाइज्ड रूप से किया जा चुका है। इसके साथ ही, व्यापम की पूर्व की समस्त चल-अचल परिसंपत्तियां (Assets) एवं विधिक देनदारियां (Liabilities) भी अब पूर्णतः नए मण्डल में विधिक रूप से समाहित हो चुकी हैं।
स्क्रैप निस्तारण के लिए भारत सरकार के उपक्रम ‘MSTC’ के साथ अनुबंध की अवधि 3 वर्ष बढ़ी
राज्य के शासकीय विभागों में पारदर्शिता लाने और कस्टमाइज्ड राजस्व सृजन के उद्देश्य से एक और महत्वपूर्ण वाणिज्यिक विधिक निर्णय लिया गया:
मंत्रिपरिषद ने राज्य के विभिन्न शासकीय विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, मण्डलों और स्थानीय निकायों में जमा कबाड़ (स्क्रैप) और अनुपयोगी सामग्रियों के पारदर्शी एवं तकनीक-आधारित निस्तारण के लिए भारत सरकार के उपक्रम मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MSTC) के साथ सेलिंग एजेंसी अनुबंध को आगामी तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का विधिक निर्णय लिया है। यह कस्टमाइज्ड अनुबंध नवंबर 2019 से अनवरत प्रभावी है, जो 31 मई 2026 को विधिक रूप से समाप्त हो रहा था।
MSTC के अत्याधुनिक ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर के खरीदार प्रतिस्पर्धी बोली लगाकर स्क्रैप खरीदते हैं, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होती है और राज्य को कस्टमाइज्ड रूप से अधिकतम राजस्व (बेहतर मूल्य) प्राप्त होता है। इस विधिक व्यवस्था के विस्तार से अब अलग-अलग विभागों को स्वतंत्र निविदा (Tender) और विज्ञापन जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे शासकीय संसाधनों व प्रशासनिक समय की भारी बचत होगी तथा कार्यालय परिसरों में स्वच्छता बनी रहेगी।
डामर (बिटुमिन) की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि से सड़क ठेकेदारों को मिली आंशिक विधिक राहत, वैश्विक भू-राजनैतिक परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों के उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो रहे सड़क निर्माण सेक्टर को बचाने के लिए साय कैबिनेट ने बड़ा कस्टमाइज्ड विधिक हस्तक्षेप किया है:
सड़क निर्माण कार्यों में 01 अप्रैल 2026 के पश्चात बिटुमिन (डामर) की कीमतों में हुई असाधारण और अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए, राज्य सरकार ने 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अल्पावधि के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत (विधिक क्षतिपूर्ति) देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
यह वित्तीय राहत केवल बिटुमिन मूल्य में हुई असाधारण वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करने के लिए एक विशेष विधिक फार्मूले के आधार पर आकलित की जाएगी। अन्य सभी निर्माण घटकों पर अनुबंध में पूर्व से निर्धारित एस्केलेशन (Escalation) नियम पूरी तरह यथावत लागू रहेंगे।
मंत्रिपरिषद का मानना है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण राज्य में डामरीकरण के कार्य प्रभावित होने लगे थे, जिससे लोक निर्माण विभाग (PWD) की संधारण परियोजनाओं की गति बाधित होने की विधिक आशंका थी। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं हेतु इसी प्रकार के कड़े कस्टमाइज्ड राहत निर्देश जारी किए जा चुके हैं। राज्य सरकार का मुख्य विधिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के विकास कार्यों की गति अवरुद्ध न हो और आम जनता को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुगम सड़क अधोसंरचना का विधिक लाभ मिल सके।









