Thursday, August 27, 2026
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Akaltara Health Department “अभी अस्पताल आने का टाइम है क्या?”: अकलतरा अस्पताल में डॉक्टर-पेशेंट विवाद का वीडियो वायरल

Akaltara Health Department: अजय यादव/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला अंतर्गत आने वाले अकलतरा विकासखंड के मुख्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में मंगलवार (26 मई 2026) को शासकीय मर्यादा और चिकित्सीय नैतिकता को तार-तार करने वाला एक कस्टमाइज्ड मामला सामने आया है। अस्पताल में आपातकालीन विधिक उपचार के लिए पहुंचे एक गंभीर मरीज की समय पर जांच करने और उसे त्वरित प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) उपलब्ध कराने के बजाय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर द्वारा कथित रूप से कड़े व संवेदनहीन शब्दों का विधिक प्रयोग किया गया। इसके बाद डॉक्टर और पीड़ित परिजनों के बीच तीखा विधिक प्रतिवाद और खूनी बहस की स्थिति निर्मित हो गई। इस पूरे घटनाक्रम का लाइव कस्टमाइज्ड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समूचे जिले के प्रशासनिक गलियारे और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

“क्या यह अस्पताल आने का समय है?”; डॉक्टर के एक विधिक जुमले पर भड़का विवाद

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अकलतरा के प्रत्यक्षदर्शियों और कस्टमाइज्ड विधिक सूत्रों से प्राप्त प्राथमिक विवरण के अनुसार, यह विवाद उस वक्त प्रारंभ हुआ जब एक पीड़ित परिवार अपने मरीज की बिगड़ती कस्टमाइज्ड शारीरिक स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड लेकर पहुंचा:

  • असंवेदनशील विधिक टिप्पणी: परिजनों का कस्टमाइज्ड आरोप है कि पीड़ित को स्ट्रेचर/बेड पर लिटाकर जब उन्होंने डॉक्टर से तत्काल विधिक परीक्षण (Medical Examination) का अनुरोध किया, तो ड्यूटी डॉक्टर ने संवेदनहीनता की विधिक सीमा को पार करते हुए कड़े लहजे में कहा— “अभी अस्पताल आने का समय है क्या? इतनी रात/बेवक्त क्यों आ रहे हो?”

  • परिजनों का विधिक प्रतिवाद: डॉक्टर के इस गैर-पेशेवर आचरण को सुनकर मरीज के साथ आए प्रबुद्ध परिजन पूरी तरह भड़क गए। उन्होंने डॉक्टर को याद दिलाया कि शासन के विधिक नियमों के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौबीस घंटे (24 Hours) आपातकालीन विधिक सेवाएं देने के लिए कस्टमाइज्ड है, ऐसे में किसी भी समय आने वाले मरीज को विधिक उपचार देने से इनकार करना या उस पर कस्टमाइज्ड फब्तियां कसना पूरी तरह गैर-कानूनी और विधिक सेवा शर्तों का घोर उल्लंघन है।

परिसर में रहा तीव्र विधिक तनाव; स्थानीय नागरिकों ने कराया बीच-बचाव

इस तीखी कस्टमाइज्ड बहस के चलते अस्पताल परिसर के भीतर और ओपीडी (OPD) क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक तीव्र विधिक तनाव का माहौल बना रहा। दोनों पक्षों के बीच आवाजें इतनी तेज हो गईं कि अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों के विधिक स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा। स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए वहां उपस्थित स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों ने तत्काल विधिक हस्तक्षेप (Intervention) किया और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामले को कस्टमाइज्ड रूप से शांत कराया, जिसके बाद जैसे-तैसे मरीज की विधिक जांच संपन्न हो सकी।

अस्पताल प्रबंधन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) ने लिया विधिक संज्ञान

इस संवेदनशील कस्टमाइज्ड घटनाक्रम और वायरल वीडियो के साक्ष्यों को जिला प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता से संज्ञान में लिया है। अकलतरा क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट को विधिक संदेश भेजकर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं के इस लचर और कड़े कस्टमाइज्ड रवैये पर तीव्र विधिक आपत्ति दर्ज कराई है।

प्रशासनिक एवं विधिक रुख: इस संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तथा अकलतरा अस्पताल के विधिक खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) ने स्पष्ट किया है कि शासकीय अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक नागरिक को विधिक गरिमा के साथ त्वरित चिकित्सा पाने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। लोक सेवक आचरण नियमावली (Conduct Rules) के तहत किसी भी डॉक्टर या शासकीय कर्मचारी का यह कस्टमाइज्ड व्यवहार विधिक रूप से क्षम्य नहीं है। मामले की विधिक और कस्टमाइज्ड जांच हेतु तीन सदस्यीय प्रशासनिक टीम का गठन कर दिया गया है। वायरल वीडियो की सत्यता और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विवेचना के उपरांत दोषी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी विभागीय दंडात्मक कार्रवाई संस्थित कर निलंबन (Suspension) की विधिक अनुशंसा रायपुर मुख्यालय भेजी जाएगी।
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