रायपुर: राजधानी रायपुर में शाम 5 बजे से रात 9 बजे के बीच मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध ने व्यापारिक गतिविधियों को पूरी तरह से पंगु बना दिया है। आज छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और विभिन्न ट्रांसपोर्ट संघों की एक संयुक्त बैठक संपन्न हुई, जिसमें इस प्रतिबंध के कारण उत्पन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में 200 से अधिक ट्रांसपोर्टर्स और व्यापारियों ने एक सुर में प्रशासन के इस निर्णय का विरोध किया।
व्यापार पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव: ट्रांसपोर्टरों ने बैठक में अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि रायपुर एक बड़ा होलसेल हब है, जहाँ से पूरे प्रदेश में माल की आपूर्ति होती है। मौजूदा प्रतिबंधों के कारण लगभग 90 फीसदी माल की आवाजाही थम गई है। गर्मी का मौसम होने के कारण कूलर, ए.सी. और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मांग चरम पर है, लेकिन समय पर डिलीवरी न हो पाने से व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने प्रतिबंध तो लगा दिया, लेकिन लोडिंग-अनलोडिंग के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी है।
चैम्बर की मांग: ‘ट्रांसपोर्ट नगर’ हो विकसित चेम्बर के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि व्यापार को बाधित करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि चैम्बर जल्द ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करेगा ताकि यातायात व्यवस्था और व्यापारिक सुगमता के बीच संतुलन बनाया जा सके। थौरानी ने दीर्घकालिक समाधान के तौर पर प्रशासन से शहर के बाहर एक सुव्यवस्थित ‘ट्रांसपोर्ट नगर’ विकसित करने की पुरजोर मांग की है। इससे न केवल शहर को ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगी, बल्कि व्यापारियों का काम भी सुचारू रूप से चल सकेगा।
बैठक में इनकी रही उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण बैठक में चेम्बर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकिशन सुंदरानी, कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया, सलाहकार गुरजीत सिंह संधू, उपाध्यक्ष लोकेश चंद्रकांत जैन और बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी जैसे स्वरूप चोपड़ा, कमल किशोर गोलछा, हरचरण सिंह साहनी सहित सैकड़ों ट्रांसपोर्टर मौजूद रहे। सभी ने एकमत से प्रशासन से अनुरोध किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे की रणनीति तय की जाएगी।











