Chai Wale Baba : राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कसारी (सुकुलदैहान के पास) में इन दिनों आस्था का भव्य संगम देखने को मिल रहा है। देश के लोकप्रिय धर्मगुरु, भागवत कथा वाचक, समाज सुधारक और ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री, जिन्हें उनके भक्त “चाय वाले बाबा” के नाम से जानते हैं, के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। बाबा के कथित चमत्कारी दावों और सरल कथा शैली का लाभ लेने के लिए दूर-दूर से भक्तों का तांता लग रहा है।
Chai Wale Baba
कौशल प्रदेश के सिलयारी धाम से संबंध रखने वाले पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री की सफलता किसी चमत्कार से कम नहीं मानी जाती है। छत्तीसगढ़ के एक निर्धन परिवार में जन्मे शास्त्री जी के आज पूरे भारत में करोड़ों अनुयायी हैं। उन्हें विशेष रूप से उनके सादे जीवन और निस्वार्थ सेवा के लिए जाना जाता है। जानकारी के अनुसार, वे लंबे समय से केवल लाल चाय और पानी पीकर ही जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें ‘चाय वाले बाबा’ की उपाधि मिली।
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Chai Wale Baba
पंडित नरेंद्र नयन शास्त्री की सबसे बड़ी विशेषता उनके द्वारा चावल और लाल फूल से किसी भी व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान की अनसुलझी जानकारी का उल्लेख करना है। उनके अनुयायियों का दावा है कि उन्होंने एक मुट्ठी चावल और लाल फूल के जरिए छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसकी भविष्यवाणी भी सटीक की थी। उनकी इस अनूठी ज्योतिषीय विद्या का लाभ लेने के लिए कथा के बाद भक्तों की लंबी कतार लगती है। उनके भक्त केवल सनातन धर्म से ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों से भी संबंध रखते हैं।
Chai Wale Baba : शास्त्री जी की कथा कहने का अंदाज अत्यंत ही निराला और मधुर है। वे अपनी कथा के माध्यम से भक्तों को हंसते-हंसते भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी से जोड़ देते हैं। साथ ही, वे मनुष्य को जीवन में अपने कर्मों को सुधारने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनका मुख्य कार्य जनसेवा और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित है। वे भारत में जहां भी भागवत कथा का आयोजन करते हैं, उसे पूरी तरह निशुल्क करते हैं, जिससे गरीब से लेकर धनवान व्यक्ति तक उनके ज्ञान का लाभ उठा रहा है।
चाय वाले बाबा अपनी कथा में आने वाले चढ़ावे को पूरी तरह से लोक कल्याण के कार्यों में समर्पित कर देते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस राशि का उपयोग निर्धन और गरीब कन्याओं की शादी कराने तथा निशक्तजनों की सेवा करने में किया जाता है। अब तक पंडित जी के द्वारा 439 से अधिक निर्धन कन्याओं का विवाह (कन्यादान) कराया जा चुका है, जो उनके समाज सेवा के प्रति गहरे समर्पण को दर्शाता है। उनके इस जनकल्याणकारी कार्य और चमत्कारिक ज्ञान के कारण आज उनकी ख्याति राष्ट्रीय स्तर पर फैल चुकी है।









