Sunday, August 16, 2026
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Bhilai Ashram Reunion : भिलाई में 11 महीने बाद मां-बेटी का भावुक मिलन, आश्रम में छलक पड़े आंसू

Bhilai Ashram Reunion की यह कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है। छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित एक आश्रम में बिहार के भागलपुर से लापता हुई 65 वर्षीय बबीता देवी अपनी बेटी पूजा से पूरे 11 महीने बाद मिलीं।

जैसे ही बेटी पूजा ने अपनी मां को सामने देखा, वह खुद को संभाल नहीं सकी। वह दौड़कर मां के गले लग गई और फूट-फूटकर रोने लगी। वहां मौजूद लोग भी इस भावुक पल को देखकर भावुक हो उठे।

‘10 दिन में लौटूंगी’ कहकर निकली थीं घर से

Missing Woman Found मामले के अनुसार बबीता देवी 3 जून 2025 को अपने मायके जगतपुर, बांका जाने के लिए घर से निकली थीं।उन्होंने बेटी पूजा से कहा था कि वह 10 दिन में वापस लौट आएंगी। लेकिन इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन महीनों तक कोई सुराग नहीं मिला।

पहले पति का दर्द, फिर मां के बिछड़ने का सदमा

पूजा की जिंदगी पहले से ही संघर्षों से भरी रही है।करीब 32 साल पहले उसके पिता पुण्यदेव सिंह, जो सेंट्रल कोलफील्ड्स में मैनेजर थे, अचानक लापता हो गए थे। उनका आज तक कोई पता नहीं चल सका।पति के गायब होने के बाद बबीता देवी मानसिक रूप से टूट गई थीं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को अकेले संभाला। मां और बेटी एक-दूसरे का सहारा बनकर जी रहे थे।

भिलाई में विक्षिप्त हालत में मिलीं बबीता देवी

इधर, Bhilai News के मुताबिक बबीता देवी भिलाई से करीब 15 किलोमीटर दूर विक्षिप्त हालत में मिली थीं।फील परमार्थम आश्रम के मुख्य सेवक अमित राज उन्हें अपने साथ आश्रम लेकर आए। आश्रम में रहते हुए बबीता देवी बार-बार सिर्फ एक ही बात दोहराती थीं — “मुझे घर जाना है, गेट खोल दो।”वह अपना पूरा पता नहीं बता पा रही थीं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था।
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‘जगतपुर बांका’ नाम बना उम्मीद की किरण

आश्रम के सेवकों ने लगातार धैर्य के साथ उनसे बातचीत जारी रखी।10 मई को बातचीत के दौरान बबीता देवी की यादों में ‘जगतपुर बांका’ नाम सामने आया। इसके बाद आश्रम प्रबंधन ने तुरंत बिहार के बांका पुलिस से संपर्क किया।जांच के बाद 11 मई को बेटी पूजा तक सूचना पहुंची कि उसकी मां सुरक्षित मिल गई हैं।

मां के लिए नौकरी की चिंता छोड़ पहुंची बेटी

फोन पर मां के मिलने की खबर सुनते ही पूजा रो पड़ी।उस समय वह कोचिंग क्लास में थी। उसने छुट्टी मांगी, लेकिन छुट्टी नहीं मिली। इसके बाद पूजा ने साफ शब्दों में कहा — “मेरी मां नौकरी से ज्यादा जरूरी है।”इसके बाद वह बिना रिजर्वेशन साउथ बिहार एक्सप्रेस की जनरल बोगी में बैठकर भिलाई पहुंच गई।

मिलन का पल देख हर आंख हुई नम

जब पूजा आश्रम पहुंची और मां को देखा तो वह खुद को रोक नहीं पाई।मां बबीता देवी भी कांपते हाथों से बेटी के सिर पर हाथ फेरती रहीं। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया।

200 से ज्यादा बेसहारा लोगों को मिला सहारा

Feel Parmartham Ashram अब तक 200 से ज्यादा बेसहारा और लापता लोगों को आश्रय दे चुका है।संस्था 55 लोगों को उनके परिवारों से दोबारा मिलाने में सफल रही है। वर्तमान में आश्रम में करीब 96 लोग रह रहे हैं।

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