Unity March Controversy : जांजगीर-चांपा यूनिटी मार्च विवाद : मंच पर कुर्सी के लिए बहस, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, देखें…

Unity March controversy : जांजगीर-चांपा। लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जिले में आयोजित “यूनिटी मार्च” (एकता मार्च) का कार्यक्रम विवादों के घेरे में आ गया है। इस एकता प्रदर्शित करने वाले आयोजन के दौरान मंच पर ही भारतीय जनता पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच कुर्सी पर बैठने को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पार्टी और आयोजन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह घटना जांजगीर-चांपा में यूनिटी मार्च के उपलक्ष्य में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के मंच पर हुई। वीडियो में देखा जा सकता है कि पूर्व सांसद कमला देवी पाटले और पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह चंदेल मंच पर बहस कर रहे हैं। हालांकि विवाद की सटीक वजह सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फुटेज में पूर्व सांसद कमला देवी पाटले कुछ कहती हुई नज़र आ रही हैं, जबकि पूर्व जिला अध्यक्ष गुलाब सिंह चंदेल हाथ जोड़कर उन्हें शांत करने या अपनी बात समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

Unity March controversy
वीडियो को देखकर लगाए जा रहे कयासों के अनुसार, संभवतः पूर्व सांसद की कुर्सी उनके बेहद पास रखी थी और पास बैठे किसी व्यक्ति का हाथ उन्हें लग गया, जिससे उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई। यह भी हो सकता है कि बैठने की व्यवस्था को लेकर दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच कोई मतभेद उत्पन्न हुआ हो। बहरहाल, मंच पर भरी सभा के बीच दोनों नेताओं के बीच हुआ यह सार्वजनिक विवाद चर्चा का विषय बन गया है।

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Unity March controversy
सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है, और इस अवसर पर आयोजित ‘यूनिटी मार्च’ का मुख्य उद्देश्य ही देश और पार्टी में एकजुटता का संदेश देना होता है। ऐसे में, मंच पर दो प्रमुख नेताओं का आपस में उलझना पार्टी की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया यूजर्स के बीच व्यापक रूप से फैल गया है।

सोशल मीडिया यूजर्स अब इस वायरल वीडियो को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि यह कैसी “यूनिटी मार्च” है, जहाँ मंच पर ही बैठने की मामूली बात को लेकर सार्वजनिक रूप से विवाद हो रहा है। इस घटना ने आयोजन के मुख्य उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और स्थानीय राजनीतिक गलियारों में यह विवाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पार्टी के भीतर इस घटना को अनुशासनहीनता के तौर पर भी देखा जा सकता है।

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