Supreme Court Order : अब पुलिस, ED, CBI को गिरफ्तारी से पहले लिखित कारण बताना अनिवार्य….

Supreme Court Order : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी जांच एजेंसियों, जिसमें पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED), और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) शामिल हैं, के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद, गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप से देना अनिवार्य होगा, अन्यथा गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा।

Supreme Court Order : मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह फैसला सुनाया।

लिखित कारण ‘मौलिक अधिकार’

न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने $52$ पन्नों के विस्तृत निर्णय में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मौलिक सुरक्षा है।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी मनमाने ढंग से नहीं हो सकती। इसके पीछे ठोस, स्पष्ट और कानूनी आधार होना जरूरी है। गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि उसे किस मामले में और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है।

 प्रमुख दिशा-निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु निर्धारित किए हैं, जो देशभर की सभी एजेंसियों पर लागू होंगे:

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नियम विवरण परिणाम
कारण बताना गिरफ्तारी का आधार लिखित रूप में दिया जाना अनिवार्य होगा। यह संविधान का आदेश है, इसे टाला नहीं जा सकता।
भाषा लिखित कारण उसी भाषा में होना चाहिए जिसे आरोपी समझ सके। आरोपी को अपने अधिकारों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
विलंब की स्थिति यदि तत्काल लिखित कारण देना संभव न हो, तो पहले मौखिक रूप से कारण बताए जाएं। बाद में लिखित नोटिस/गिरफ्तारी मेमो रिमांड से कम से कम दो घंटे पहले आरोपी को सौंपा जाए।
उल्लंघन का परिणाम यदि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए गए। गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा, और आरोपी रिहा होने का हकदार होगा।

यह फैसला जुलाई 2024 में मुंबई में हुए बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू हिट-एंड-रन केस से जुड़े ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया।

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यह आदेश पूरे भारत में तुरंत प्रभाव से लागू हो। इसके लिए आदेश की प्रति सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी जाएगी।

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