Bacheli Tailing Dam Issue : दलदल पर खड़ा किया जा रहा टेलिंग डैम: एसडीएम की छापेमारी में कंपनी के कर्मचारी फरार, निर्माण पर उठे सवाल

Bacheli Tailing Dam Issue : बचेली (दंतेवाड़ा): लौह नगरी बचेली में कल्पतरु कंपनी द्वारा बनाए जा रहे नए टेलिंग डैम के निर्माण में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सोमवार को एसडीएम विवेक चंद्रा के नेतृत्व में जब प्रशासनिक अमले ने अचानक कार्यस्थल का निरीक्षण किया, तो वहां की बदहाली देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन और माइनिंग विभाग के विशेषज्ञों ने पाया कि डैम का निर्माण किसी वैज्ञानिक पद्धति के बजाय महज औपचारिकता के लिए किया जा रहा है। हैरानी की बात यह रही कि जांच दल को देखते ही कंपनी के जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी कार्यस्थल छोड़कर भाग खड़े हुए।

निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि डैम के लिए न तो सॉइल टेस्ट कराया गया और न ही फाउंडेशन का कोई उचित ढांचा तैयार किया गया। दलदली जमीन पर सीधे टिप्परों से मिट्टी गिराकर दीवारें खड़ी की जा रही हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारी नरेंद्र चौहान ने बताया कि तकनीकी रूप से मिट्टी को हर 30 सेंटीमीटर की लेयर में डालकर पानी के छिड़काव के साथ कंपैक्ट (संघनन) करना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ 5 मीटर की ऊंचाई तक बिना किसी तकनीकी प्रक्रिया के मिट्टी भर दी गई है। यही नहीं, पंप हाउस की खुदाई के दौरान अभी से ही डैम में सीपेज (रिसाव) नजर आने लगा है, जो भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है।

इस लापरवाही का सबसे भयानक पहलू यह है कि यदि यह निर्माणाधीन डैम भविष्य में टूटता है, तो इसका सीधा मलबा और पानी नीचे बसे ‘पढ़ापुर’ गांव को अपनी चपेट में ले लेगा। जानकारों का कहना है कि यदि नया डैम 70 प्रतिशत तक भरता है, तो पुराने डैम की संरचना पर भी दबाव बढ़ेगा और वह ध्वस्त हो सकता है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वर्तमान में डाली गई अनुपयुक्त मिट्टी को पूरी तरह हटाकर नए सिरे से तकनीकी विधि से निर्माण शुरू करना चाहिए, अन्यथा किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

एसडीएम विवेक चंद्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल निर्माण संबंधी सभी दस्तावेजों और तकनीकी रिपोर्ट की जानकारी एकत्र की जा रही है। अन्य विशेषज्ञों से भी विस्तृत जांच कराई जाएगी ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल, कंपनी की इस कार्यप्रणाली ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

खामियां जो जांच में मिलीं

  • फाउंडेशन: बिना किसी ठोस आधार के दलदल पर निर्माण।

  • मटेरियल: गुणवत्ताहीन मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थरों का अनियंत्रित उपयोग।

  • तकनीकी चूक: लेयरिंग और कंपैक्शन की प्रक्रिया का पूरी तरह अभाव।

  • सुरक्षा: शुरुआती चरण में ही सीपेज (रिसाव) की समस्या।

Share The News
[youtube_shorts]

Popular News

CG Transfer Breaking : वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा फेरबदल, 21 कर्मचारियों का तबादला

CG Transfer Breaking :रायपुर। राज्य शासन के वाणिज्यिक कर...

Raipur Police Commissioner: IPS डॉ. संजीव शुक्ला ने संभाला पुलिस आयुक्त का पदभार… जानिए क्या कुछ कहा

Raipur Police Commissioner:रायपुर : रायपुर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के...

raipur-gold-shop-robbery-arrest:लक्ष्य ज्वेलर्स चोरी केस: डॉग स्क्वॉड की मदद से पुलिस ने दबोचे आरोपी

raipur-gold-shop-robbery-arrest: राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित लक्ष्य ज्वेलर्स...

Related Articles

Popular Categories