निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक स्थित भलेरा धान उपार्जन केंद्र में धान के बोरों पर मोटर पंप से पानी डालने के मामले में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। वायरल वीडियो सामने आने के बाद कलेक्टर गौरव सिंह द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही पाई गई, जिसके बाद चार कर्मचारियों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
वायरल वीडियो से खुला मामला
कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति धान के बोरों पर मोटर पंप से पानी डालता हुआ दिखाई दे रहा था। बताया गया कि यह घटना आरंग क्षेत्र के प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित भलेरा के धान खरीदी केंद्र की है।हालांकि केंद्र में उस समय CCTV कैमरे चालू नहीं थे, लेकिन किसी व्यक्ति द्वारा बनाया गया वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया।
जांच में 10,500 बोरों में नमी मिली
मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने मौके पर पहुंचकर जांच की और पाया कि लगभग 10,500 धान के बोरों में नमी मौजूद थी, जिससे यह आशंका मजबूत हुई कि धान के वजन को बढ़ाने के लिए पानी डाला गया था।
चार कर्मचारियों की लापरवाही उजागर
जांच में प्रभारी प्रबंधक विष्णु साहू, लिपिकीय सहायक उमेश कुमार साहू, प्रोसिसर्वर इंदरमन निषाद और दैनिक कर्मचारी जितेंद्र कुमार साहू की लापरवाही सामने आई।अधिकारियों ने पाया कि इन सभी की कार्यप्रणाली छत्तीसगढ़ धान उपार्जन नीति 2025-26 के नियमों के विपरीत थी।
प्रशासन ने लिया सख्त फैसला
जांच रिपोर्ट के आधार पर उप आयुक्त सहकारिता ने चारों कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए।प्रशासन का कहना है कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है और इस तरह की अनियमितता को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसानों के भरोसे पर असर
धान खरीदी केंद्रों में इस तरह की घटनाएं किसानों के भरोसे और सरकारी व्यवस्था की साख पर भी असर डालती हैं। ऐसे में प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में धान खरीदी केंद्रों की निगरानी और सख्त की जाएगी ताकि इस तरह की गड़बड़ियां दोबारा न हो सकें।











