Animal Welfare Gharghoda News : गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा: एक ओर जहां भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर के कारण आम जनता पानी की किल्लत से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर नगर की सड़कों पर भटकने वाले लावारिस मवेशियों की हालत और भी दयनीय हो गई है। चिलचिलाती धूप में बेजुबान मवेशी बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। नगर पंचायत से लेकर तथाकथित गौ-सेवकों तक, किसी ने भी इन मूक पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना जरूरी नहीं समझा है।
पशुपालकों की क्रूरता का शिकार: नगर में भटक रहे इन मवेशियों की बदहाली के पीछे पशुपालकों की क्रूरता एक बड़ा कारण है। जब तक ये मवेशी दूध देने या कार्य करने में सक्षम रहते हैं, तब तक तो मालिक उनकी देखभाल करते हैं, लेकिन जैसे ही वे बूढ़े या बीमार होते हैं, उन्हें ‘बोझ’ समझकर सड़कों पर लावारिस छोड़ दिया जाता है। पहले घरों के सामने रखी पानी की टंकियां इन पशुओं की प्यास बुझाती थीं, लेकिन अब वह मानवीय परंपरा भी धीरे-धीरे समाप्त हो रही है।
पॉलिथीन और नालियों का गंदा पानी ही सहारा: सड़क पर भटकने वाले ये मवेशी पेट की आग बुझाने के लिए प्लास्टिक की थैलियों और दुकानों से फेंके गए कचरे (पुट्टा कागजों) को खाने को मजबूर हैं। पानी के अभाव में वे नालियों का दूषित जल पीने को विवश हैं, जिससे वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने बताया कि पॉलिथीन खाने और गंदगी पीने के कारण कई मवेशियों की तड़प-तड़पकर करुण मृत्यु हो रही है, लेकिन प्रशासन के पास इन बेजुबानों के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी: इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्राम पंचायत बोईदा की सरपंच ईश्वरी मरावी, नंदलाल पटेल, उत्तम पटेल, कौशल श्रीवास्तव, शत्रुघन करपे सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने नगर में मवेशियों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि नगर में जगह-जगह इंसानों के लिए प्याऊ तो खोले गए हैं, लेकिन मवेशियों की प्यास बुझाने का ख्याल किसी को नहीं आया। यह नगर के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि गौ-वंश आज उपेक्षा और प्यास से मरने की कगार पर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से मवेशियों के लिए पानी की टंकियां और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।











