Sukma Collector Tadmetla Visit : सुकमा (कृष्णा नायक)। बस्तर के घने जंगलों के बीच बसा ताड़मेटला गांव, जो कभी नक्सली हिंसा और दहशत का पर्याय माना जाता था, आज एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना। आजादी के सात दशकों बाद यह पहला अवसर था जब जिले के कोई कलेक्टर इस सुदूर और संवेदनशील गांव की दहलीज तक पहुंचे। कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण ने दुर्गम रास्तों और पगडंडियों को पार कर ग्रामीणों के बीच पहुंचकर विश्वास की एक नई इबारत लिखी है।
जंगलों को पार कर ग्रामीणों के बीच पहुंची प्रशासनिक टीम कलेक्टर अमित कुमार, एसपी किरण चव्हाण, डीआईजी (CRPF) आनंद सिंह पुरोहित और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर ने न केवल गांव का दौरा किया, बल्कि ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर सीधा संवाद किया। यह पहल महज एक दौरा नहीं, बल्कि मुख्यधारा से कटे हुए आदिवासियों के मन में शासन के प्रति भरोसा जगाने की एक सशक्त कोशिश है।
मौके पर ही 45 लाख की सौगात, पंचायत के खाते में राशि ट्रांसफर ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों को समझते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही विकास कार्यों के लिए 45 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। इसमें प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी और पंचायत भवन का निर्माण शामिल है। प्रशासन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 15 लाख रुपये की अग्रिम राशि तत्काल पंचायत के खाते में हस्तांतरित कर दी गई ताकि काम रुकने न पाए। साथ ही, अगले एक सप्ताह के भीतर हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
2010 का दंश और 2026 की नई सुबह ताड़मेटला वही स्थान है जहाँ 2010 में नक्सलियों ने 76 जवानों को शहीद कर देश को दहला दिया था। वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रहे इस गांव में अब प्रधानमंत्री आवास, महतारी वंदन योजना, वृद्धा पेंशन और तेंदूपत्ता खरीदी जैसी सरकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। ग्रामीणों ने पहली बार महसूस किया कि सरकार और प्रशासन उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
कलेक्टर की भावुक अपील: “अब विकास आपके हाथ में” चौपाल के दौरान कलेक्टर अमित कुमार ने ग्रामीणों से भावुक अपील करते हुए कहा, “अब आपके गांव का भविष्य और विकास आपके अपने हाथों में है। इन सरकारी भवनों को पूरी गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करें। प्रशासन आपकी हर समस्या के समाधान के लिए हर कदम पर आपके साथ खड़ा है।”











