Saturday, August 15, 2026
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Compensation Plea Dismissed : जबलपुर हाईकोर्ट: मारुति सुजुकी से 200 करोड़ के मुआवजे की मांग वाली याचिका खारिज, कोर्ट में ‘भ्रूण’ लाने पर जज ने लगाई कड़ी फटकार

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Compensation Plea Dismissed : जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने एक सनसनीखेज मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 200 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह वही मामला है जिसने पिछले दिनों तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब याचिकाकर्ता सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में एक ‘भ्रूण’ लेकर पहुंच गया था। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने इस कृत्य को न्यायालय की गरिमा के खिलाफ बताते हुए याचिकाकर्ता को सख्त चेतावनी दी है।

क्या था पूरा मामला? याचिकाकर्ता दयाशंकर पांडेय ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki) के खिलाफ याचिका दायर की थी। उनका दावा था कि उन्होंने कंपनी में 200 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा किया था, जिसके बाद उन पर और उनके परिवार पर हमले किए गए। याचिकाकर्ता का आरोप था कि एक हमले के दौरान उनकी पत्नी का गर्भपात हो गया। उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि:

  • कंपनी से 200 करोड़ रुपये की वसूली कराई जाए।

  • उनकी बेटी के इलाज के लिए 82 लाख रुपये दिलाए जाएं।

  • पुलिस को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए जाएं।

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘अदालत नाटकीयता का मंच नहीं’ सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा भ्रूण लाने की घटना पर गहरी नाराजगी जताई। न्यायालय ने टिप्पणी की, “अदालत को भावनात्मक प्रदर्शन या नाटकीयता का मंच नहीं बनाया जा सकता। ऐसी हरकतें न्यायालय की गरिमा के विरुद्ध हैं।” कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसा कृत्य दोहराया गया, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बिना ठोस आधार और साक्ष्य की याचिका अदालत ने पाया कि याचिका में लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई भी दस्तावेजी साक्ष्य या शिकायतों की प्रतियां प्रस्तुत नहीं की गईं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका तभी विचारणीय होती है जब आरोपों के पीछे ठोस आधार हो।

  • अस्पष्टता: याचिका को आधारहीन और अस्पष्ट पाया गया।

  • विकल्प: कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट है, तो वह कानून के तहत सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी बात रख सकता है।

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