Gas Suffocation Death Delhi : नई दिल्ली (08 फरवरी 2026): राजधानी के जहांगीरपुरी इलाके में 7 फरवरी की रात एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। मोमोज बनाकर उसे बेचने की तैयारी कर रहे दो युवक रात में गैस हीटर (सिगड़ी) बंद करना भूल गए और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर सो गए। सुबह जब कमरा खुला तो दोनों की जान जा चुकी थी।
मृतकों की पहचान और संघर्ष की कहानी
पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान मुसाफिक आलम (18 वर्ष) और रुकसद आलम (30 वर्ष) के रूप में हुई है। ये दोनों बिहार के रहने वाले थे और दिल्ली के जहांगीरपुरी में किराए के कमरे में रहकर मोमोज बेचने का काम करते थे।
कैसे हुआ हादसा?
जांच में सामने आया कि शनिवार रात दोनों ने अगले दिन की बिक्री के लिए गैस आधारित मोमो स्टीमर (सिगड़ी) पर मोमोज तैयार किए थे। काम खत्म करने के बाद वे गैस बंद करना भूल गए।
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घुटन का कारण: कमरा छोटा और चारों तरफ से बंद था। रात भर गैस के जलने और रिसाव के कारण कमरे में ऑक्सीजन खत्म हो गई और जहरीले धुएं (कार्बन मोनोऑक्साइड) का स्तर बढ़ गया।
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नींद में ही मौत: धुएं के प्रभाव के कारण दोनों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और गहरी नींद में ही उनका दम घुट गया।
भाई ने खोला दरवाजा तो उड़े होश
हादसे का पता रविवार सुबह तब चला जब मुसाफिक के बड़े भाई ने कई कॉल किए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। वह कमरे पर पहुँचा तो अंदर से धुआं निकलता देख दंग रह गया। दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने पर देखा कि मुसाफिक और रुकसद बिस्तर पर बेजान पड़े थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया।
पुलिस और FSL की प्रारंभिक जांच
जहांगीरपुरी थाना पुलिस ने क्राइम टीम और FSL (Forensic Science Laboratory) के साथ घटनास्थल का मुआयना किया।
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कोई साजिश नहीं: कमरे में किसी भी तरह के संघर्ष या जबरन प्रवेश के निशान नहीं मिले हैं, जिससे पुलिस इसे एक दुर्घटना मान रही है।
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पोस्टमार्टम: शवों को बाबू जगजीवन राम अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है। पुलिस का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।











