रीवा : मध्य प्रदेश के रीवा जिले के समान थाना क्षेत्र से स्वास्थ्य व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। नेशनल हॉस्पिटल में भर्ती महिला मरीज की मौत के बाद देर रात अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में घोर लापरवाही के आरोप लगाए।
मृतका की पहचान कामिनी सोधिया के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान डॉक्टर मौजूद नहीं थे और नर्स ही इलाज करती रही, जिसके चलते मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप: डॉक्टर नहीं, नर्स कर रही थी इलाज
परिजनों का कहना है कि कामिनी की हालत बिगड़ने के बावजूद डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचे। मरीज घंटों तड़पती रही, लेकिन न तो समय पर उचित दवाएं दी गईं और न ही किसी वरिष्ठ चिकित्सक ने स्थिति की समीक्षा की।
परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर समय रहते सही इलाज मिलता, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती।
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हंगामे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस
महिला की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। मामला बढ़ता देख समान थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने परिजनों से आवेदन लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल भेज दिया है।
पुलिस का बयान
इस मामले पर एसडीओपी उमेश प्रजापति ने बताया कि “परिजनों के आवेदन के आधार पर शव को पीएम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, नेशनल हॉस्पिटल के डॉक्टर अखिलेश पटेल ने परिजनों के आरोपों को नकारते हुए कहा कि“मरीज की हालत अस्पताल पहुंचने से पहले ही बेहद गंभीर थी। शुरू से ही उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी।”
हालांकि, परिजन इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर हालत इतनी गंभीर थी, तो डॉक्टर अस्पताल में मौजूद क्यों नहीं थे और नर्स से इलाज क्यों कराया जा रहा था।
जांच के बाद खुलेगा सच
अब पूरा मामला जांच के दायरे में है। यह साफ होगा कि:
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मौत बीमारी की वजह से हुई
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या फिर निजी अस्पताल की लापरवाही ने एक और जिंदगी छीन ली
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।











