प्रयागराज : मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर रविवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित संगम तट पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। माघ मेले के अवसर पर देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचे। तड़के सुबह से ही संगम क्षेत्र “हर-हर गंगे” और “जय गंगा मैया” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कड़ाके की ठंड के बावजूद आस्था के साथ संगम में डुबकी लगाई।
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया है। संगम तट और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई है। प्रशासन लगातार लाउडस्पीकर और कंट्रोल रूम के माध्यम से लोगों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
#WATCH | Ayodhya, UP | A devotee says, “I am feeling very good after taking a holy dip on the occasion of Mauni Amavasya…This is the blessing of the almighty that devotees are braving the cold and taking a holy dip…” https://t.co/zMUzI2Ufoy pic.twitter.com/GHON37XSOo
— ANI (@ANI) January 18, 2026
सहायता केंद्र और वॉलंटियर कर रहे हैं मार्गदर्शन
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह सहायता केंद्र बनाए गए हैं, जहां मेडिकल, सूचना और मार्गदर्शन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही सिविल डिफेंस के वॉलंटियर भी तैनात किए गए हैं, जो स्नान के बाद श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम निकास मार्ग की ओर भेज रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि लोग स्नान के बाद अनावश्यक रूप से रुकें नहीं, जिससे भीड़ का दबाव न बढ़े।
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श्रद्धालुओं ने जताया आध्यात्मिक आनंद
संगम में स्नान करने पहुंची एक श्रद्धालु ने कहा, “मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में पवित्र स्नान करके मन को गहरी शांति मिली है। ठंड के बावजूद यहां आकर स्नान करना ईश्वर की विशेष कृपा जैसा लगता है।” कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया।
आस्था, अनुशासन और परंपरा का संगम
मौनी अमावस्या का स्नान सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। माघ मेले के दौरान संगम तट पर उमड़ी यह भीड़ न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की जीवंत तस्वीर भी प्रस्तुत करती है।









