Mahayuti Victory BMC : मुंबई। देश की सबसे अमीर महानगर पालिका (BMC) के चुनावी नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई की जनता ने ‘विकास के ब्रांड’ पर मुहर लगाई है। 227 सीटों वाली बीएमसी में बीजेपी-शिंदे गठबंधन (महायुति) ने 118 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा (114) पार कर लिया है। बीजेपी अकेले 90 सीटों पर जीत/बढ़त के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना 28 सीटों पर काबिज है।
ठाकरे ब्रदर्स को करारा झटका: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को केवल 63 सीटें मिलती दिख रही हैं, जो 2017 की तुलना में 19 सीटों का बड़ा नुकसान है। वहीं राज ठाकरे की मनसे (MNS) भी कोई खास करिश्मा नहीं कर पाई और 6 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। कांग्रेस को 12 और अजित पवार की एनसीपी को 1 सीट से संतोष करना पड़ा है।
कौन बनेगा मुंबई का अगला मेयर? चार साल के लंबे इंतजार के बाद मुंबई को नया मेयर मिलने जा रहा है। बीजेपी ने पहले ही साफ कर दिया है कि मेयर मराठी समुदाय से ही होगा। रेस में दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं:
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नील सोमैया: दिग्गज नेता किरीट सोमैया के बेटे, जो दूसरी बार पार्षद चुने गए हैं।
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तेजस्वी घोसालकर: चुनाव से ठीक पहले उद्धव गुट छोड़ बीजेपी में शामिल हुईं तेजस्वी ने दहिसर से बंपर जीत दर्ज की है। उन्हें मेयर पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
45 साल का संघर्ष और जीत: 1980 में गठन के बाद से बीजेपी कभी भी बीएमसी में अपना मेयर नहीं बना सकी थी। 2017 में पार्टी 82 सीटों तक पहुँची थी, लेकिन तब गठबंधन धर्म के नाते शिवसेना को समर्थन दिया था। इस बार सियासी बाजी पलटते हुए बीजेपी ने सीधे तौर पर मुंबई पर कब्जा कर लिया है।
मेयर की ताकत और चयन प्रक्रिया: बीएमसी के 227 निर्वाचित पार्षद (नगर सेवक) ही मेयर का चुनाव करते हैं। मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है। हालांकि प्रशासनिक ताकत नगर आयुक्त (Commissioner) के पास होती है, लेकिन राजनीतिक रूप से मेयर का पद मुंबई की सत्ता का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है।











