भोपाल : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तारीफ किए जाने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनके बयान को साहसिक करार दिया, वहीं दूसरी ओर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने तीखा तंज कसते हुए इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति बताया।
विजयवर्गीय बोले—सच कहने का साहस दिखाया
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद सामान्य हैं, लेकिन सच कहने का साहस हर किसी में नहीं होता। उन्होंने कहा कि RSS की तारीफ कर दिग्विजय सिंह ने अपने साहसी होने का परिचय दिया है।विजयवर्गीय ने यह भी जोड़ा कि इस बयान से भले ही दिल्ली दरबार में उनके नंबर कम हुए हों, लेकिन उन्होंने कांग्रेस के भीतर सरदार पटेल जैसी परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है, जहां सच बोलने की हिम्मत रखी जाती थी।
लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन सच कहने का साहस भी होना चाहिए जो हर किसी में नहीं होता।@INCIndia नेता @digvijaya_28 ने @RSSorg की तारीफ करके अपने साहसी होने का परिचय दिया है।
हालांकि इससे दिल्ली दरबार में उनके नंबर अवश्य कम हुए होंगे, पर दिग्विजय सिंह ने…
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) December 29, 2025
नरोत्तम मिश्रा का पलटवार
दूसरी ओर, बीजेपी नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ओसामा बिन लादेन की आत्मा दोजख में रो रही होगी और जाकिर नाइक खुद को अनाथ महसूस कर रहा होगा।नरोत्तम मिश्रा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह ही भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों के जनक रहे हैं और अब RSS की तारीफ करना उनके पुराने बयानों से उलट है।
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राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा बयान
नरोत्तम मिश्रा ने इस पूरे घटनाक्रम को राज्यसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि कहीं यह कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाने की रणनीति तो नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 2020 में भी राज्यसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक उठापटक देखने को मिली थी।
RSS से सीख लेने की कही थी बात
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें लालकृष्ण आडवानी समेत वरिष्ठ नेता कुर्सियों पर बैठे हैं और नरेंद्र मोदी जमीन पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर के जरिए उन्होंने RSS के जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका से सीख लेने की बात कही थी, जिसने सियासी विवाद को जन्म दे दिया।











