Friday, August 21, 2026
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Naxalite attack : पवन खेड़ा का नड्डा पर पलटवार : ’12 साल बाद याद आया नक्सली हमला? जांच हो कि जेपी नड्डा अब तक चुप क्यों थे’

Naxalite attack : नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले को लेकर किए गए दावों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। नड्डा के इस आरोप पर कि ‘2013 के नक्सली हमले में कांग्रेस के लोग शामिल थे’, खेड़ा ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि अगर भाजपा के पास ऐसी जानकारी थी, तो वे 12 साल तक चुप क्यों रहे? उन्होंने मांग की है कि जेपी नड्डा से इस संबंध में पूछताछ होनी चाहिए कि वे किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

Naxalite attack : पवन खेड़ा ने तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा, “2013 में छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सत्ता में थी। यदि नड्डा का दावा सही है, तो क्या वे यह स्वीकार कर रहे हैं कि उनकी अपनी सरकार जांच करने और साजिश रोकने में पूरी तरह विफल रही थी?” खेड़ा ने इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच की मांग की ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच खेड़ा ने अपनी ही पार्टी के सांसद शशि थरूर द्वारा बिहार सरकार की तारीफ किए जाने पर चुटकी ली। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि जब थरूर दिल्ली लौटेंगे, तो वे उनका चश्मा उधार लेना चाहेंगे ताकि वे भी बिहार को उसी नजरिए से देख सकें, जैसा थरूर को दिखाई दे रहा है। यह बयान बिहार में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को दर्शाने के लिए दिया गया।

चीन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के मुद्दे पर राहुल गांधी के बयानों का समर्थन करते हुए पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि चीन ने वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग पर कब्जा कर लिया है, जिससे भारत के युवा बेरोजगार हो रहे हैं। खेड़ा ने सवाल किया कि जब भी कांग्रेस युवाओं के रोजगार और चीन की चुनौती पर बात करती है, तो भाजपा असहज क्यों हो जाती है और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश क्यों करती है?

अंत में, नेशनल हेराल्ड मामले का जिक्र करते हुए खेड़ा ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक बार फिर अदालत में मुंह की खानी पड़ी है। उन्होंने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट ने ED को राहत देने से इनकार कर दिया है। खेड़ा के अनुसार, यह देश के इतिहास का पहला ऐसा मामला है जिसे किसी आम नागरिक की शिकायत पर राजनीतिक द्वेष के चलते खींचा जा रहा है, लेकिन न्यायपालिका के रुख से सत्य की जीत हो रही है।

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