Kailash Kol death : CCTV फुटेज ने खोली पोल : 2023 के चर्चित कैलाश कोल मौत मामले में ASI सूर्यबली सिंह पर गिरी गाज

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Kailash Kol death : मऊगंज: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में करीब डेढ़ साल पहले थाने के भीतर हुई एक आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मजिस्ट्रेटियल जांच की रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने ही विभाग के एक एएसआई (ASI) समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई ने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह साबित कर दिया है कि कानून की नजर में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।

Kailash Kol death : यह मामला 16 फरवरी 2023 का है, जब घुरेहटा निवासी 29 वर्षीय आदिवासी युवक कैलाश कोल को चोरी के संदेह में ग्रामीणों ने बंधक बना लिया था। डायल-100 की टीम मौके पर पहुंची और घायल अवस्था में ही कैलाश को थाने लाकर मुंशी कक्ष में बैठा दिया गया। उस समय ड्यूटी पर तैनात एएसआई सूर्यबली सिंह पर आरोप है कि उन्होंने युवक की बिगड़ती हालत को नजरअंदाज किया। पूछताछ के दौरान ही कैलाश की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने थाने में जमकर हंगामा किया था।

Kailash Kol death : न्यायिक जांच के दौरान जब थाने के CCTV फुटेज खंगाले गए, तो उसमें एएसआई सूर्यबली सिंह और अन्य आरोपियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। मजिस्ट्रेटियल जांच में पुलिसिया लापरवाही और प्रताड़ना के पुख्ता सबूत मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया। पुलिस ने एएसआई सूर्यबली सिंह के साथ-साथ विवेक गिरी, वीरेंद्र उर्फ वीरू रजक और गणेश गिरी को आरोपी बनाया है। इन सभी पर धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 330, 342, 34 और अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

Kailash Kol death : मऊगंज एसडीओपी सचि पाठक ने शनिवार को मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि लंबी जांच और साक्ष्यों के संकलन के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों को शनिवार शाम न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि विवेचना अब भी जारी है और इस मामले में शामिल किसी भी अन्य दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।

Kailash Kol death : इस गिरफ्तारी के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है, हालांकि समाज में इस बात को लेकर अब भी रोष है कि एक घायल युवक को अस्पताल ले जाने के बजाय थाने में क्यों बिठाया गया। यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस प्रशासन की छवि को सुधारने के लिए इसे एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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