Challenging the government : गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़-घरघोड़ा। जिले के घरघोड़ा तहसील में इन दिनों ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कुरकुट नदी के अस्तित्व को मिटाने के लिए भू-माफिया, भ्रष्ट खाकी और सत्ताधारी दल के एक रसूखदार पार्षद ने ऐसा त्रिकोण बनाया है कि प्रशासन असहाय नजर आ रहा है। आलम यह है कि दिन के उजाले में बेखौफ होकर नदी का सीना छलनी किया जा रहा है और खनिज विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक सब कुछ जानकर भी अनजान बना हुआ है।
Challenging the government : खाकी की ‘एंट्री’ फीस: ₹1000 से ₹2000 में बिक रहा ईमान
सूत्रों का दावा है कि घरघोड़ा थाने के कुछ आरक्षकों ने इस अवैध कारोबार को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। रेत तस्करों से प्रति गाड़ी 1000 से 2000 रुपये की मासिक ‘एंट्री फीस’ वसूली जा रही है। जो तस्कर यह रकम चुका देता है, उसे ‘अभयदान’ मिल जाता है। फिर उसकी गाड़ियां चाहे थाने के सामने से गुजरें या एसडीएम कार्यालय के पास से, कोई उन्हें रोकने की जहमत नहीं उठाता। वर्दी पर लग रहे ये दाग पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
Challenging the government : कृषि के नाम पर रजिस्ट्रेशन, माफियागिरी में उपयोग
क्षेत्र की सड़कों पर दौड़ रहे सैकड़ों ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन सरकारी कागजों में ‘कृषि कार्य’ के लिए है ताकि टैक्स की बचत की जा सके। लेकिन ये ‘कृषि पुत्र’ नहीं बल्कि ‘माफिया मित्र’ बनकर काम कर रहे हैं। बैय्हामुढा, कंचनपुर और करीछापर जैसे घाटों से रोजाना सैकड़ों ट्रिप रेत चोरी कर घरघोड़ा, तमनार और बसनपाली के इलाकों में खपाया जा रहा है। आरटीओ और खनिज विभाग की चुप्पी से राजस्व को हर दिन लाखों रुपये का चूना लग रहा है।
Challenging the government : पार्षद की सरपरस्ती में फल-फूल रहा काला साम्राज्य
इस पूरे अवैध सिंडिकेट का मास्टरमाइंड सत्ताधारी भाजपा का एक स्थानीय पार्षद बताया जा रहा है। चर्चा है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण ही अधिकारियों के हाथ इन माफियाओं तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। अब ट्रैक्टरों के साथ-साथ हाईवा जैसी बड़ी गाड़ियों का भी इस्तेमाल नदी से रेत निकालने में किया जा रहा है। जब सत्ता के नुमाइंदे ही प्राकृतिक संसाधनों की लूट में ‘सरगना’ की भूमिका निभाने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
Challenging the government : प्रशासन की आँखों पर बंधी पट्टी
विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि घरघोड़ा एसडीएम बंगले और थाने के ठीक सामने से ओवरलोड रेत की गाड़ियां दिन भर गुजरती हैं, लेकिन धूल के गुबार अधिकारियों को नजर नहीं आते। क्या यह अधिकारियों की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान नहीं है? या फिर ‘ऊपर से नीचे तक’ कमीशन के खेल ने प्रशासन को पंगु बना दिया है?
Challenging the government : कलेक्टर से जनता की आस: कब चलेगा कार्रवाई का हंटर?
रायगढ़ के ऊर्जावान कलेक्टर से अब घरघोड़ा की जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर फाइलों से बाहर निकलकर धरातल पर कार्रवाई कब होगी? क्या अवैध उत्खनन में शामिल ट्रैक्टरों को राजसात किया जाएगा? क्या वसूली में लिप्त पुलिसकर्मियों और संरक्षण देने वाले ‘सफेदपोश’ नेताओं पर सख्त कार्रवाई होगी? जब तक बड़ी मछलियों पर शिकंजा नहीं कसा जाएगा, कुरकुट नदी का अस्तित्व इसी तरह मिटता रहेगा।











