Saturday, August 15, 2026
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Protection of human rights : अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर जबलपुर में राष्ट्रीय सम्मेलन, व्यावहारिक क्रियान्वयन पर जोर

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Protection of human rights : जबलपुर। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के अवसर पर, राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन द्वारा आज गोहलपुर स्थित अग्रवाल लॉन में एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन और स्थापना दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए संगठन के पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज की और मानव अधिकारों की रक्षा तथा जन जागरूकता को लेकर अपने गहन विचार साझा किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके बाद आयोजित सम्मेलन में वक्ताओं ने मानव अधिकारों के महत्व, उनके संरक्षण और समाज में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने एक सुर में इस बात पर जोर दिया कि मानव अधिकार केवल कागजी दस्तावेजों तक ही सीमित न रह जाएं, बल्कि आमजन के दैनिक जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू हों, ताकि हर व्यक्ति गरिमापूर्ण जीवन जी सके।

Protection of human rights : सम्मेलन के दौरान इस बात पर विशेष चर्चा की गई कि आम नागरिकों को उनके मूलभूत अधिकारों के प्रति कैसे जागरूक किया जा सकता है और प्रशासनिक स्तर पर इन अधिकारों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। वक्ताओं ने मानव गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और न्याय जैसे संवैधानिक और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक, संगठित और सक्रिय होने का आह्वान किया।

Protection of human rights : सेवानिवृत्त एडीजे सुनील मिश्रा और राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सविता मालवीय जैसे प्रमुख पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अधिकारों के हनन के मामलों को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना और त्वरित न्याय दिलाना समय की मांग है। महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष ने खासकर महिलाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई।

Protection of human rights : कार्यक्रम के अंत में, संगठन के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में केक काटा गया और सभी पदाधिकारियों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए मानव अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित भाव से कार्य करते रहने का पुनः संकल्प लिया। यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि अधिकारों के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

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