रायपुर : राजधानी रायपुर में कुख्यात तोमर गैंग की गतिविधियों के बावजूद पुलिस अब तक हिस्ट्रीशीटर रोहित सिंह तोमर को गिरफ्तार नहीं कर सकी, जो पिछले 6 महीनों से फरार है। पुलिस ने सोमवार को उसकी गिरफ्तारी के लिए 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया, जिससे एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि इतनी लंबी फरारी के बावजूद पुलिस हाथ खाली क्यों है?जबकि उसका भाई वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी सिंह पहले ही गिरफ्तार होकर जेल में है, लेकिन रोहित का अब तक गिरफ्त में न आना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
8 गंभीर केस, फिर भी 6 महीने से फरार – नाकामी क्यों?
रोहित और वीरेंद्र पर हत्या, अपहरण, दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग, जबरन वसूली जैसे दर्जनों गंभीर अपराध दर्ज हैं। इनके खिलाफ
- पुरानी बस्ती
- देवेंद्र नगर
- तेलीबांधा
आदि थानों में 8 से अधिक केस दर्ज हैं।
इतने गंभीर अपराधों के बावजूद एक आरोपी का 6 महीने तक फरार रहना पुलिस की विफलता को दिखाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि
- या तो आरोपी कहीं न कहीं लोकल सपोर्ट से सुरक्षित है
- या फिर पुलिस की कार्रवाई में वह कड़ाई नहीं दिख रही जो ऐसे मामलों में अपेक्षित है
- कई नागरिक इसे कानून व्यवस्था पर सवाल के रूप में देख रहे हैं।
व्यापारियों से करोड़ों की वसूली – लेकिन कार्रवाई धीमी क्यों?
तोमर गैंग ने शहर में कई लोगों से करोड़ों रुपये की वसूली की।
- एक पीड़ित से 20 लाख
- दूसरे से 28 लाख
- एक और से चार गुना सूद वसूली
- और कई मामलों में मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न
- इतनी आपराधिक पृष्ठभूमि के बावजूद सरकार और पुलिस का धीमा एक्शन जनता में अविश्वास बढ़ा रहा है।
Read More : C.G News : पत्थलगांव में स्कूल बस ब्रेक फेल, सड़क किनारे झाड़ियों में घुसी, बच्चों में मची चीख-पुकार
गिरफ्तारी में देरी से बढ़ा आरोपियों का मनोबल
कानूनी जानकारों का मानना है कि,“जब किसी गैंग का सदस्य महीनों तक पुलिस को चकमा देता है, तो यह अपराधियों का मनोबल बढ़ाता है और कानून का भय कम होता है।” कई व्यापारियों का आरोप है कि तोमर गैंग की पकड़ शहर में गहरी रही है। पुलिस की असमर्थता ने पीड़ितों में भी यह धारणा बनाई है कि शिकायत करने के बावजूद सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती।
सरकार और पुलिस प्रशासन को घेरे सवाल
इस केस ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
इतने गंभीर मामलों में आरोपी का 6 महीने फरार रहना प्रशासन की कमजोर खुफिया जानकारी की ओर इशारा है।
- क्या आरोपी को किसी स्तर पर राजनीतिक या स्थानीय संरक्षण प्राप्त है?
- क्यों नहीं अब तक STF/Crime Branch की विशेष टीमें लगाई गईं?
- क्या पुलिस ने पिछले 6 महीनों में आरोपी के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की?
- क्या संपत्ति कुर्की या लोकेशन ट्रैकिंग जैसी कड़ी कार्रवाई की गई?
इन सवालों पर सरकार की चुप्पी जनता को असंतुष्ट कर रही है।
पुलिस का दावा– कार्रवाई जारी, जल्द गिरफ्तारी
हालांकि इस बाबत रायपुर पुलिस का कहना है कि “गैंग के नेटवर्क पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी होगी।”लेकिन लंबी फरारी और नाकाम खोज अभियान लोगों के मन में यह सवाल छोड़ रहा है कि— क्या सरकार और पुलिस इस गैंग को जड़ से खत्म करने में वाकई गंभीर है?











