भोपाल। मध्य प्रदेश में सिरप से बच्चों की मौत के मामले में सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार को ड्रग इंस्पेक्टर्स की टीम ने राज्य के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। जिन शहरों में कार्रवाई हुई उनमें उज्जैन, जबलपुर, भिंड सहित अन्य जिले शामिल हैं। टीम ने आयुष फार्मा और न्यू अपना फार्मा कंपनी पर छापा मारते हुए कोल्ड्रिफ कफ सिरप की 248 बोतलें जब्त की हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी बोतलें उसी बैच की हैं जो जांच में फेल पाई गई थीं।
छिंदवाड़ा में हुई बच्चों की मौत के बाद प्रदेश सरकार ने इस सिरप पर बैन लगा दिया था। परासिया थाना पुलिस ने तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी और सिरप प्रिस्क्राइब करने वाले डॉक्टर प्रवीन सोनी के खिलाफ केस दर्ज किया है। डॉक्टर सोनी को निलंबित भी कर दिया गया है।
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ड्रग इंस्पेक्टरों के मुताबिक, जिन दवाओं के सैंपल लिए गए हैं, वे उसी बैच से संबंधित हैं जिसमें डायएथिलिन ग्लायकॉल की मात्रा 46.2 फीसदी पाई गई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि यही तत्व बच्चों की मौत का मुख्य कारण बना। सरकारी डॉक्टरों पर भी आरोप है कि वे प्राइवेट क्लीनिकों से यह दवा मरीजों को लिखते रहे।
राज्य सरकार की पांच दिन की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि लापरवाही के कारण ये मौतें हुईं। इस सिरप को मध्य प्रदेश से पहले राजस्थान और तमिलनाडु में भी प्रतिबंधित किया जा चुका था।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मानकों पर खरी न उतरने वाली किसी भी दवा को प्रदेश में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मृतक बच्चों के परिजनों को आर्थिक सहायता और बीमार बच्चों के नि:शुल्क इलाज की घोषणा भी की है।













