Wednesday, May 20, 2026
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : ED की चार्जशीट से बड़ा खुलासा, Big-Boss वॉट्सऐप ग्रुप से सामने आए कई बड़े राज

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद अब ‘Big-Boss’ नाम के एक वॉट्सऐप ग्रुप का पर्दाफाश हुआ है। इस ग्रुप में चैतन्य बघेल, पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया और कई अन्य आरोपी शामिल थे। ED का दावा है कि इस ग्रुप के चैट में शराब घोटाले से जुड़े पैसों के लेन-देन और आपत्तिजनक बातों के सबूत मिले हैं।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : IAS अफसरों को गाली देती थीं सौम्या चौरसिया

ED की चार्जशीट के अनुसार, सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट के सदस्यों से बात करते समय IAS अफसरों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करती थीं। चैट में उन्होंने कई बार हिसाब-किताब की जानकारी न देने पर भी नाराजगी जताई है। चार्जशीट में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले के पैसे को ‘डिलीवर’ शब्द से संबोधित किया जाता था। चैट्स के मुताबिक, चैतन्य के लिए पप्पू बंसल और सौम्या के लिए दीपेंद्र कुरियर बॉय का काम करते थे और पैसे पहुंचाते थे।

हजार करोड़ का लेनदेन और रियल एस्टेट में ब्लैक मनी

इस मामले में मुख्य गवाह बने शराब कारोबारी पप्पू बंसल ने ED को पूछताछ में बताया कि उन्होंने और चैतन्य ने मिलकर 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कैश मैनेज किया। यह रकम अनवर ढेबर के जरिए कांग्रेस नेताओं तक पहुंचाई जाती थी। बंसल ने यह भी स्वीकार किया कि सिर्फ तीन महीने में उन्हें 136 करोड़ रुपए मिले।

ED ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि इस ब्लैक मनी को रियल एस्टेट में लगाया गया। चैतन्य ने अपने ‘विठ्ठल ग्रीन’ और ‘बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स’ जैसे प्रोजेक्ट्स में इस अवैध रकम का निवेश किया। दस्तावेजों में कम खर्च दिखाया गया, जबकि असल में करोड़ों रुपए का लेन-देन कैश में हुआ, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं था।

मोबाइल चैट्स से मिली बड़ी जानकारी

अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल फोन की जांच से और भी गहरे राज सामने आए। अनवर के फोन में चैतन्य का नंबर ‘बिट्टू’ नाम से सेव था, जिसमें पैसों की डीलिंग और नकली होलोग्राम बनाने जैसी बातों पर चर्चा की गई थी।

ED के मुताबिक, यह पूरा सिंडिकेट फरवरी 2019 में बना था, जिसमें प्रदेश के तीन डिस्टलरी मालिकों के साथ मिलकर प्रति पेटी कमीशन तय किया गया था। इस कमीशन के बदले डिस्टलरी संचालकों को शराब के रेट बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था। इस तरह पूरे कारोबार को तीन हिस्सों में बाँटकर पैसों का हिसाब-किताब किया जाता था।

यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला सकता है, क्योंकि अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) भी इस मामले में चैतन्य बघेल को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।

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