भारतमाला मुआवजा घोटाला : न रिपोर्ट, न कार्रवाई… 600 करोड़ का घोटाला फिर सुर्खियों में….

Parivesh
भारतमाला मुआवजा घोटाला

भारतमाला मुआवजा घोटाला : रायपुर। 600 करोड़ के चर्चित भारतमाला मुआवजा घोटाले की अंतिम जांच रिपोर्ट अब तक पेश नहीं हो सकी है। जांच अधिकारियों को कई बार समय बढ़ाकर दिया गया, लेकिन न तो रिपोर्ट सौंपी गई और न ही लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। संभागायुक्त ने नोटिस देने की चेतावनी जरूर दी थी लेकिन वह भी कागज़ों से बाहर नहीं निकल पाई।

भारतमाला मुआवजा घोटाला : दरअसल, प्रभावित ग्रामीणों से आईं आपत्तियों और शिकायतों की जांच के लिए चार समितियाँ बनाई गई थीं। इनमें से रायपुर जिले के लिए उपायुक्त ज्योति सिंह, अपर कलेक्टर निधि साहू और संयुक्त कलेक्टर उमाशंकर बांदे की समिति बनाई गई थी। वहीं धमतरी जिले की जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर इंदरा देवहारी को दी गई थी। समितियों को 14 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन एक समिति ने अब तक अपनी जांच पूरी नहीं की है।

यह मामला विशाखापट्टनम-रायपुर कॉरिडोर के तहत सामने आया था, जहाँ एसडीएम निर्भय साहू समेत राजस्व विभाग के अधिकारियों पर भूमाफियाओं को कई गुना अधिक मुआवजा दिलाने का आरोप है। इससे सरकारी खजाने को लगभग 600 करोड़ का नुकसान हुआ। घोटाला उजागर होने के बाद मार्च में तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू सहित दो तहसीलदार और तीन पटवारियों को निलंबित कर दिया गया था। फिलहाल जांच ईओडब्ल्यू के पास है, जिसने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुका है, लेकिन आरोपी अब भी फरार हैं।

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