Saturday, August 15, 2026
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Supreme Court : ‘शहरों के फैलाव से सिमट रहे जंगल, विकास की कीमत चुका रहे वन्यजीव’

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नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण शहरों और कस्बों का फैलाव जंगलों तक पहुंच रहा है, जिससे इंसान-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने चेताया कि इसका सबसे ज्यादा असर आदिवासी और गरीब वर्गों पर पड़ रहा है।

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इंसान ही जिम्मेदार

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह टकराव जानवरों की गलती नहीं, बल्कि मानव विस्तार का परिणाम है। अन्य जजों बी.वी. नागरत्ना और एम.एम. सुंद्रेश ने भी इसी बात की पुष्टि की और इंसान केंद्रित सोच के बजाय प्रकृति केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता जताई।

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कमजोर वर्गों को सबसे बड़ा नुकसान

न्यायाधीश ने कहा कि आदिवासी और हाशिए पर रहने वाले लोग अक्सर अपने कानूनी अधिकारों और मुआवजे से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें सहायता नहीं दी गई, तो ये मानव महत्वाकांक्षाओं का शिकार बन सकते हैं।

न्याय और राहत

जस्टिस सूर्यकांत ने ‘2025 NALSA स्कीम’ का उल्लेख किया, जो पीड़ितों को तेजी से मुआवजा, कानूनी सहायता और राहत प्रदान करेगी। केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नितिन जमदार ने इसे इस मुद्दे के समाधान में गेम चेंजर बताया।

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केरल सरकार की पहल

राज्य कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर स्तर पर है और मौजूदा कानून पर्याप्त नहीं हैं। राज्य सरकार ने इस संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करना सहित कई कदम उठाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और केरल सरकार की पहल इस दिशा में सकारात्मक बदलाव की संभावना जताती हैं, ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

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