भिंड | (मनीष ऋषीश्वर,भिंड) मध्य प्रदेश के भिंड जिले में बुधवार, 27 अगस्त 2025 को कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और स्थानीय भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह के बीच हुई जबरदस्त तकरार ने जिले के प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया। यह घटना कलेक्टर निवास पर तब घटित हुई जब विधायक कुशवाह खाद की कथित कमी के मुद्दे को लेकर किसानों के एक कथित समूह के साथ कलेक्टर से मिलने पहुंचे और वहां बातचीत के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों के बीच गर्मागर्म बहस हो गई,जो अंततः व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक जा पहुंची ।
वार्तालाप के दौरान कलेक्टर द्वारा उंगली दिखाए जाने पर विधायक भड़क गए और मुक्का मारने की कोशिश की। हालांकि, कलेक्टर के सुरक्षा गार्डों ने तत्काल हस्तक्षेप कर हाथापाई होने से रोक दिया। इसके बाद, विधायक कुशवाह कलेक्टर निवास परिसर में ही लगभग चार घंटे तक धरने पर बैठे रहे। इस अप्रिय घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय प्रशासन का ध्यान भटकाया, बल्कि जिले के राजस्व कर्मचारियों में भारी आक्रोश पैदा किया ।
घटनाक्रम की विस्तृत समयरेखा
तालिका: भिंड कलेक्टर-विधायक विवाद की प्रमुख घटनाएं
दिनांक समय घटना
27 अगस्त 2025 सुबह विधायक कुशवाह किसानों के साथ कलेक्टर निवास पहुंचे।
27 अगस्त 2025 को पहुंचने के बाद कलेक्टर और विधायक के बीच तीखी बहस।
27 अगस्त 2025 दोपहर को भिंड विधायक द्वारा कलेक्टर निवास पर धरना।
27 अगस्त 2025 दोपहर 3 बजे के करीब विधायक द्वारा धरना समाप्त।
28 अगस्त 2025 सुबह राजस्व कर्मचारियों का काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन।
28 अगस्त 2025 दोपहर विधायक द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को विशेष अधिकार हनन के संबंध में शिकायती पत्र।
28 अगस्त 2025 शाम आई.ए.एस अधिकारी संघ की मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग।
विवाद के मूल कारण
1. रेत माफिया की भूमिका
इस विवाद की सबसे गहरी जड़ अवैध रेत खनन से जुड़ी हुई प्रतीत होती है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि खाद की कमी का मुद्दा महज एक “बहाना” है, जबकि असली मुद्दा रेत चोरी है। उन्होंने दावा किया कि कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने रेत चोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं, जिससे विधायक कुशवाह बौखलाए हुए हैं,वहीं सूत्र बताते हैं कि लगातार कुछ रेत के ट्रैक्टर करीबियों के पकड़े जाने और उन्हें बिना जुर्माने के छोड़े न जाने पर जब सहमति नहीं बनी तो ये सिफारिश एक तकरार में बदल गई।
कलेक्टर श्रीवास्तव ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि जिले में अवैध रेत परिवहन रोकने के लिए स्थानीय राजस्व निरीक्षक आलोक भदौरिया को लगाया गया है,जो ईमानदारी से काम कर रहा है और माफिया पर “भारी पड़ रहा है”। उन्होंने यह भी बताया कि विधायक के साथ जो लोग उनके निवास पर आए थे,उनमें से अधिकांश पर रेत चोरी के मामले दर्ज हैं ।
खाद वितरण को लेकर मतभेद
आधिकारिक तौर पर विवाद का तात्कालिक कारण खाद के वितरण को लेकर उत्पन्न हुआ मतभेद बताया जा रहा है। विधायक कुशवाह का आरोप है कि जिले में किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है और प्रशासन इस मामले में उदासीन रवैया अपना रहा है। इसके विपरीत, कलेक्टर श्रीवास्तव ने दावा किया कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है और शासन द्वारा पर्याप्त मात्रा में खाद भेजी जा रही है,हालांकि ये बात सही है कि सोसाइटियों को खाद न देते हुए वितरण प्रणाली में थोड़ा परिवर्तन कर दिया,,सभी व्यापारियों के काउंटर भी लगा दिए हैं जिससे खाद ब्लैक होने का खतरा कम हो और किसानों पूरा खाद मिल सके,लेकिन इस व्यवस्था से किसानों की भीड़ खण्डस्तर पर ही एकत्रित हो गई है।
हालांकि कलेक्टर ने इसमें आगे बताया है कि पुरानी गल्ला मंडी में कुछ लोग एक ही किसान परिवार के दो-तीन सदस्यों को लाइन में खड़ा कर कतारें लंबी दिखा रहे हैं, जिससे खाद की किल्लत का झूठा माहौल बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सौ बीघा वाले किसानों को जरूरत से ज्यादा खाद दी जाए, तो बिचौलियों के हावी होने और जिले में खाद की किल्लत बढ़ने का खतरा है।
विवाद के बाद की प्रतिक्रियाएं
राजस्व कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन
विधायक कुशवाह के “अभद्र व्यवहार” के विरोध में गुरुवार, 28 अगस्त को जिलेभर के राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यबंदी का आह्वान किया। एसडीएम, तहसीलदार, आरआई और पटवारियों सहित सभी राजस्व कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और कामकाज पूरी तरह बंद रखा। नई तहसील कार्यालय में कर्मचारियों ने धरना देकर विधायक की हरकत की कठोर निंदा की है।
राजस्व अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें लिखा था कि विधायक ने कलेक्टर के सरकारी आवास में अपमानजनक व्यवहार किया और बलपूर्वक वहां घुसे थे। इससे प्रशासनिक तंत्र को गहरा आघात पहुंचा है और सभी कर्मचारियों के अंदर असुरक्षा का माहौल बन गया है ।
आईएएस अधिकारी संघ की प्रतिक्रिया
इस मामले ने प्रशासनिक अधिकारियों के बीच भारी आक्रोश पैदा किया है। आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन से मिलकर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों को अपमानजनक शब्दावली से बचाने के लिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए ।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं
इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने भिंड विधायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि “कलेक्टर ने रेत चोरी रोकी, तो बौखलाए विधायक”। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक भिंड नगर पालिका पर कब्जा कर उसे लूटने की कोशिश कर रहे हैं और कांग्रेस किसी भी कीमत पर नगर पालिका को “रेत माफिया” के हवाले नहीं होने देगी ।
दूसरी ओर, विधायक कुशवाह ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को एक पत्र लिखकर कलेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने उन्हें अपशब्द कहे और दबाव बनाने के लिए उंगली दिखाकर अभद्रता की। साथ ही, उन पर रेत चोरी के आरोप लगाकर उत्तेजित करने की कोशिश की है।
विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह का विवादित इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह किसी प्रशासनिक अधिकारी के साथ विवाद में घिरे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2012 में तत्कालीन भिंड एएसपी जयदेवन ए को थप्पड़ जड़ने का आरोप भी उन पर लग चुका है। आईपीएस जयदेवन ए उस समय अवैध शराब की बिक्री की सूचना मिलने पर छापेमारी करने गए थे ।
आपको बतादें कि नरेंद्र सिंह कुशवाह तीसरी बार विधायक बने हैं और उनकी छवि भिंड जिले में एक दबंग विधायक के रूप में है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, वे 12वीं पास हैं और उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। लोकसेवक पर हमले को लेकर उन्हें छह महीने की सजा भी हो चुकी है। साथ ही, भिंड देहात थाना क्षेत्र में उनके खिलाफ आईपीसी की धारा-342, 506 बी, 504 और 34 के तहत एक मामला लंबित है। एससी एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज है और अपहरण कर मारपीट का मामला भी उनके खिलाफ दर्ज है ।
घटना के प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
आम जनता को परेशानी
इस विवाद का सीधा नकारात्मक प्रभाव आम जनता पर पड़ा है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जिले भर में सरकारी कामकाज ठप्प रहा, जिससे आवेदकों को घंटों भटकना पड़ा। एडवोकेट सुमित दीक्षित ने कहा- “कलेक्टर और विधायक के विवाद की कीमत आम जनता को चुकानी पड़ी।” वहीं आवेदक सौरभ सिंह ने कहा- “कलेक्टर और विधायक दोनों बड़े लोग हैं, लेकिन उनकी लड़ाई में आम जनता पिस रही है” ।
सरकार की छवि को नुकसान
कलेक्टर और विधायक के बीच इस खुले टकराव ने न केवल सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि जनता के कामकाज पर भी सीधा असर डाला है। राजस्व विभाग के विरोध के कारण पूरा दिन काम बाधित रहा, जिससे सरकारी तंत्र की कमजोरी स्पष्ट हो गई।
मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने इस पूरे मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी इस प्रकार के माहौल में काम करेंगे, तो उनका मनोबल गिर सकता है। तिवारी ने यह भी कहा कि यदि अधिकारी या कर्मचारी अपने कार्य में चूक करते हैं, तो उनकी शिकायत उचित जगह पर की जाए, लेकिन किसी को भी कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है ।
भविष्य की चुनौतियां और संभावित समाधान
भिंड कलेक्टर और विधायक के बीच हुआ यह विवाद प्रशासनिक-राजनीतिक संबंधों में आई दरार को साफ उजागर करता है। एक ओर जहां जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्रशासन के समक्ष उठाएं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों को भी चाहिए कि वे जनप्रतिनिधियों का सम्मान करते हुए उनकी बात को गंभीरता से सुनें।
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं कि क्या प्रशासनिक अधिकारी बिना किसी डर के अपना कर्तव्य निभा पाएंगे? क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर जनता की सेवा कर पाएंगे? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं ये तो भविष्य में ही मिल पाएंगे।
फिलहाल, इस मामले को सुलझाने के लिए उच्चस्तरीय हस्तक्षेप आवश्यक प्रतीत होता है। मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव इस मामले में हस्तक्षेप कर यथोचित कार्रवाई कर सकते हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को न दोहराया जा सके और प्रशासनिक तंत्र की गरिमा बनी रहे सके।
इस विवाद ने भिंड जिले की जनता और प्रशासन दोनों को गहरा सबक दिया है कि व्यक्तिगत विवादों को सार्वजनिक हित से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए। आशा की जानी चाहिए कि भविष्य में जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर काम करेंगे और जिले के विकास में अपना योगदान देंगे।











