Mungeli Breaking : रायपुर/मुंगेली: मुंगेली में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नियुक्तियों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता मामला सामने आया है। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के जरिए व्याख्याता की नौकरी हासिल करने वाले अक्षय सिंह राजपूत पर अब बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है।
Mungeli Breaking : मुंगेली कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि वह तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करें और रिपोर्ट सौंपें। साथ ही अक्षय सिंह पर FIR दर्ज करने की अनुशंसा भी की गई है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष बोहित राम चंद्राकर की शिकायत पर हुई, जो बीते तीन वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे थे।
अशिकायत में यह आरोप लगाया गया कि 31 मई 2023 को अक्षय सिंह राजपूत ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की, जिसकी अब प्रमाणित पुष्टि हो चुकी है। बावजूद इसके संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।
Mungeli Breaking : इस मामले में अब सवाल उठने लगे हैं कि सीईओ राजीव तिवारी और ग्रामीण उद्यान अधिकारी पूजा पहारे पर कब कार्रवाई होगी? इन पर भी फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे सरकारी नौकरी करने का आरोप है। खबर है कि 18 जुलाई को दिव्यांगता का भौतिक परीक्षण कराने के लिए निर्देशित किया गया था, लेकिन परीक्षण नहीं कराया गया है।
Mungeli Breaking : यह मामला न केवल दिव्यांगजनों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है, बल्कि सरकारी मशीनरी की लापरवाही और मिलीभगत को भी उजागर करता है। अब निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि दोषियों को सजा मिलती है या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
Mungeli Breaking : बता दें कि दिव्यांग संघ ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे सरकारी नौकरी करने वालों का भौतिक परीक्षण की मांग की थी, लेकिन अभी तक कई संदिग्धों ने परीक्षण नहीं कराया है। दिव्यांगों के आंदोलन के बाद प्रशासन एक्शन मोड में हैं। परीक्षण कराने विभाग को निर्देशति किया जा रहा है। साथ जिनका परीक्षण हो गया है और फर्जी साबित हुउ है उन पर कार्रवाई शुरू हो गई है।












