Mungeli News: 4.50 करोड़ के पुल का स्लैब ढहा, मुख्य अभियंता बोले- जानकारी नहीं; ईई ने क्यों छिपाई घटना? ठेकेदार की पात्रता पर भी सवाल

Mungeli News:रायपुर/मुंगेली।छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में करीब 4.50 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे मोतिमपुर–अमरटापू मंदिर पहुंच मार्ग एवं पुल निर्माण का स्लैब निर्माण के दौरान भरभराकर गिरने से लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के बाद सिर्फ निर्माण गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि ठेकेदार की पात्रता, टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी स्वीकृति, रॉयल्टी और विभागीय निगरानी तक पूरे मामले को लेकर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं।

Mungeli News:जानकारी के अनुसार अनुबंध क्रमांक 32/2024-25 के तहत करीब 1.70 किलोमीटर पहुंच मार्ग और पुल निर्माण का कार्य 12 नवंबर 2024 को मुंगेली की क्रांति कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री, कमजोर सेंट्रिंग और तकनीकी लापरवाही के कारण पहली ही बड़ी ढलाई के दौरान पुल का स्लैब गिर गया। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

Mungeli News:ठेकेदार की पात्रता पर सबसे बड़ा सवाल

Mungeli News:शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस एजेंसी को करोड़ों रुपये का पुल निर्माण सौंपा गया, उसके पास पुल निर्माण का आवश्यक अनुभव और पात्रता ही नहीं थी। मांग की गई है कि ठेकेदार का पंजीयन, लाइसेंस, ग्रेड, तकनीकी योग्यता और इतनी बड़ी परियोजना को निष्पादित करने की क्षमता की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

 

Mungeli News:टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

सूत्रों के मुताबिक इस परियोजना की निविदा प्रक्रिया कई बार हुई, लेकिन पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं मिलने के कारण टेंडर निरस्त हो गया था। आरोप है कि करीब दो वर्ष बाद उसी एजेंसी को संशोधित ड्राइंग और बढ़ी हुई लागत के साथ कार्यादेश जारी कर दिया गया। जबकि विभागीय नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि तक कार्रवाई नहीं होने पर निविदा स्वतः निरस्त मानी जाती है। ऐसे में पुराने टेंडर के आधार पर नया कार्यादेश जारी करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

निर्माण शुरू करने में देरी क्यों हुई?

शिकायत में यह भी पूछा गया है कि कार्यादेश जारी होने के बावजूद लंबे समय तक निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं किया गया। यदि समय सीमा के भीतर काम शुरू नहीं हुआ था तो अनुबंध निरस्त कर दोबारा निविदा क्यों नहीं निकाली गई।

एप्रोच रोड और ड्राइंग-डिजाइन पर भी सवाल

आरोप है कि पुल के दोनों ओर बनने वाली एप्रोच सड़क स्वीकृत प्राक्कलन और वास्तविक स्थल की स्थिति से मेल नहीं खाती। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मौके पर उतनी लंबाई उपलब्ध ही नहीं है, जितनी सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत की गई है। ड्राइंग-डिजाइन की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई गई है।

रॉयल्टी और मिट्टी भराई में भी अनियमितता के आरोप

सूत्रों के अनुसार निर्माण स्थल पर लगभग 50 से 60 लाख रुपये की मिट्टी .मुरम भराई का कार्य किया गया, लेकिन इसमें प्रयुक्त मिट्टी की वैध रॉयल्टी और खनन अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बिना वैध रॉयल्टी के खनन किया गया और शिकायतों के बावजूद खनिज विभाग ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

Mungeli News:मुख्य अभियंता बोले- जानकारी नहीं

इस पूरे मामले में जब बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता आरके रात्रे से बात की गई तो उन्होंने घटना की जानकारी नहीं होने की बात कही। इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद मुख्य अभियंता को जानकारी नहीं होना भी सवालों के घेरे में है। चर्चा है कि क्या स्थानीय अधिकारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की सूचना ही नहीं दी या मामला दबाने की कोशिश की गई।

क्या बोले थे कार्यपालन अभियंता शरद सतपथी

लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता शरद सतपथी का कहना है कि तकनीकी कारणों की जांच कराई जा रही है। यदि ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो नुकसान की भरपाई उसी से कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई होगी।

 

 

Mungeli News:अरुण साव ने कहा- यह तकनीकी चूक

उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने कहा कि निर्माण के दौरान मशीन आगे बढ़ जाने से दबाव बढ़ा और स्लैब गिर गया। उनके मुताबिक यह गुणवत्ताहीन निर्माण का मामला नहीं बल्कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान हुई तकनीकी चूक है।

Mungeli News: कांग्रेस का हमला

विपक्ष ने इस घटना को लेकर सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस के कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव का कहना है कि यदि उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में करोड़ों की परियोजना का यह हाल है तो प्रदेश के अन्य हिस्सों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

Mungeli News: निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने के बाद मामला सिर्फ एक तकनीकी दुर्घटना तक सीमित नहीं रह गया है। ठेकेदार की योग्यता, निविदा प्रक्रिया, निर्माण गुणवत्ता, रॉयल्टी और विभागीय निगरानी से जुड़े गंभीर आरोपों ने पूरे प्रकरण को बड़े विवाद में बदल दिया है। अब यह देखना होगा कि विभागीय जांच इन आरोपों की पुष्टि करती है या नहीं, और दोषी पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।

Share The News
[youtube_shorts]

Popular News

CG Transfer Breaking : वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा फेरबदल, 21 कर्मचारियों का तबादला

CG Transfer Breaking :रायपुर। राज्य शासन के वाणिज्यिक कर...

Raipur Police Commissioner: IPS डॉ. संजीव शुक्ला ने संभाला पुलिस आयुक्त का पदभार… जानिए क्या कुछ कहा

Raipur Police Commissioner:रायपुर : रायपुर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के...

Related Articles

Popular Categories