Saturday, August 22, 2026
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CG Police Recruitment: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: आरक्षक भर्ती प्रक्रिया रद्द करने से साफ इनकार

CG Police Recruitment: बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में आरक्षक (कॉन्स्टेबल) भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है। अदालत ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग करने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच (खंडपीठ) ने स्पष्ट किया कि कुछ अभ्यर्थियों पर लगे अनियमितता के आरोपों की सजा सभी निर्दोष और योग्य उम्मीदवारों को नहीं दी जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संदिग्ध पाए गए 129 अभ्यर्थियों की विस्तृत और गहन जांच कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

शारीरिक दक्षता परीक्षा में धांधली का था आरोप, मांगी थी CBI जांच

यह पूरा मामला बिलासपुर भर्ती केंद्र में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी थी कि लंबी कूद, गोला फेंक और दौड़ जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं के दौरान बड़े पैमाने पर विसंगतियां और अनियमितताएं बरती गईं। उनका आरोप था कि इस फेरबदल के कारण पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने अदालत से पूरी आरक्षक भर्ती को रद्द करने और मामले की स्वतंत्र केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की गुहार लगाई थी, जिसे अदालत ने न्यायसंगत नहीं माना।

डिवीजन बेंच की तल्ख टिप्पणी: निर्दोषों को न भुगतना पड़े खामियाजा

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सिंगल बेंच के पूर्व आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि यदि कथित गड़बड़ी में शामिल अपात्र अभ्यर्थियों की पहचान कर उन्हें पूरी प्रक्रिया से अलग करना संभव है, तो पूरी भर्ती को रोकना सही कदम नहीं होगा। अदालत ने माना कि यह मामला व्यापक स्तर पर फैले किसी संगठित या संस्थागत भ्रष्टाचार का प्रतीत नहीं होता है। विभाग ने स्वयं तत्परता दिखाते हुए शिकायतों पर प्रारंभिक जांच की है और संदिग्धों को चिन्हित किया है, इसलिए सीबीआई जांच की मांग का कोई औचित्य नहीं बनता।

वरिष्ठ अधिकारी करेंगे 129 संदिग्धों की जांच, दोषी होने पर जाएगी नौकरी

हाई कोर्ट ने मामले को पूरी तरह साफ करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा चिन्हित किए गए 129 संदिग्ध अभ्यर्थियों और संबंधित पत्राचार में शामिल अन्य उम्मीदवारों के दस्तावेजों तथा परफॉर्मेंस की जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराई जाए। कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को भी अपनी बात रखने का एक मौका दिया जाएगा। यदि वे दोषी साबित होते हैं, तो आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी।

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